
रानीपोखरी (देहरादून): रानीपोखरी क्षेत्र में प्रस्तावित विधि विश्वविद्यालय की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। प्रधान संगठन ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
बताया गया कि 2 मार्च 2019 को लिष्ट्राबाद गांव में रेशम विभाग की करीब 10 एकड़ भूमि पर देश की 22वीं लॉ यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए शिलान्यास किया गया था। उस समय इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 26 करोड़ रुपये बताई गई थी। हालांकि, सात वर्ष बीतने के बावजूद यह परियोजना शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ सकी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
प्रधान संगठन के अध्यक्ष अनूप सिंह चौहान ने कहा कि भट्टनगरी लिष्ट्राबाद में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा शिलान्यास किया गया था, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अब यह जानकारी सामने आ रही है कि उसी भूमि को प्रदेश सरकार द्वारा किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि लॉ यूनिवर्सिटी खुलने से क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ते और युवाओं को लाभ मिलता। 30 जनवरी को न्याय पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों की बैठक में भूमि आवंटन को निरस्त करने की मांग की गई थी। लोगों का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस परियोजना पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
आगे क्या होगा
प्रधान संगठन ने साफ किया है कि यदि तय समय सीमा में सरकार ने निर्णय नहीं लिया, तो स्थानीय स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में पुष्पराज बहुगुणा, सतीश सेमवाल, नितिन पंवार, अनिल कुमार सहित अन्य लोग शामिल रहे।
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