
रामनगर: उत्तराखंड के रामनगर में इन दिनों एक युवा स्वच्छता को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैला रहा है। हाथों में पंपलेट, चेहरे पर संकल्प और जुबान पर एक ही संदेश—“चलती गाड़ी से कचरा न करें, बिना कचरा किए यात्रा करें”—के साथ यह युवक सड़कों पर नजर आ रहा है। कभी वह वाहनों को रोककर पंपलेट दिखाता है, तो कभी स्कूली बच्चों और राहगीरों से संवाद कर स्वच्छता का महत्व समझाता है। इस पहल का उद्देश्य रामनगर को स्वस्थ, स्वच्छ और सुंदर बनाना है, जो एक प्रमुख पर्यटन नगरी होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रामनगर और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती आवाजाही के साथ कचरे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सड़क किनारे, जंगल के रास्तों और पर्यटक स्थलों पर फैला कूड़ा न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि शहर की छवि पर भी असर डालता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर शुरू हुए स्वच्छता अभियान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
इस अभियान से जुड़ा युवक रवि एक स्वच्छता पर काम कर रही एनजीओ के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। रवि के अनुसार, बीते पांच महीनों से उनकी टीम लगातार रामनगर में स्वच्छता अभियान चला रही है। टीम सड़क किनारे, जंगलों के रास्तों, पर्यटक स्थलों और आबादी वाले क्षेत्रों में फैला कूड़ा अपने हाथों से उठाकर सफाई कर रही है। प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है और अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है। राहगीरों और व्यापारियों ने बताया कि जब कोई सीधे संवाद कर स्वच्छता का संदेश देता है, तो उसका असर अधिक होता है। कई लोगों ने अभियान में सहयोग देने की इच्छा भी जताई है।
विशेषज्ञ / जागरूकता संदेश
रवि का मानना है कि समस्या का सबसे बड़ा समाधान कचरा उठाने से ज्यादा, कचरा गिरने से रोकना है। उनका कहना है कि यदि लोग अपनी यात्रा को साफ बना लें, तो देश का आधा कचरा अपने आप कम हो सकता है। आगे से कचरा गिरना बंद होगा, तभी पहले से पड़े कचरे को साफ करने की योजनाएं प्रभावी होंगी।
आंकड़े / तथ्य
रवि ने पर्यावरण के एक गंभीर पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, रामनगर और आसपास के क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स चिंता का विषय बनता जा रहा है। ढिकुली क्षेत्र में मार्च से जून 2025 के बीच कई बार एक्यूआई 400 से ऊपर रिकॉर्ड हुआ, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक संकेत माना जाता है।
आगे क्या होगा
एनजीओ की टीम आगे भी सफाई अभियान के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की योजना बना रही है। रवि का कहना है कि यदि शहर के लोग एक परिवार की तरह सोचें और सिर्फ कचरा न फेंकने का संकल्प लें, तो रामनगर को काफी हद तक स्वच्छ बनाया जा सकता है। इसके लिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी मानी जा रही है।





