
रामनगर में गर्जिया मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले टीले को बाढ़ और कटाव से सुरक्षित रखने के लिए चल रहे सुरक्षात्मक कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में निरीक्षण के लिए पहुंचे मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर करीब 12 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और इसका उद्देश्य मंदिर तथा आसपास के क्षेत्र को संभावित बाढ़ के खतरे से सुरक्षित रखना है। अधिकारियों को मानसून से पहले जरूरी कार्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गौरतलब है कि वर्ष 2010 की बाढ़ के बाद गर्जिया मंदिर के टीले में दरारें पड़ने लगी थीं, जो समय के साथ बढ़ती गईं। इससे मंदिर की संरचना के साथ-साथ वहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने लगातार शासन को प्रस्ताव भेजे, जिसके बाद सुरक्षात्मक कार्यों को स्वीकृति मिली।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने बताया कि परियोजना का कंप्लीशन समय पहले तय किया गया था, लेकिन कार्य के दौरान क्वांटिटी में बदलाव होने के कारण एस्टीमेट को रिवाइज करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए समय विस्तार देना तकनीकी रूप से आवश्यक है। उन्होंने ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे से अधिक किए जाएं और जरूरत पड़ने पर दो शिफ्टों में काम कराया जाए।
आंकड़े और तथ्य
परियोजना की कुल लागत करीब 12 करोड़ रुपये है। वर्तमान में इसका दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें नदी की ओर से हो रहे कटाव, नीचे की ओर स्लाइड हो रहे हिस्सों और ढीले हो रहे ब्लॉक्स को मजबूत किया जा रहा है। पहले चरण का कार्य मई 2024 में पूरा किया जा चुका है।
कार्य की प्राथमिकताएं
मुख्य अभियंता ने स्पष्ट किया कि मानसून से पहले एचएफएल (हाइएस्ट फ्लड लेवल) तक रिटेनिंग वॉल का निर्माण हर हाल में पूरा होना चाहिए। इससे अब तक किए गए कार्य सुरक्षित रहेंगे और गर्जिया मंदिर को बाढ़ के खतरे से बचाया जा सकेगा। इसके बाद प्लाटिंग और अन्य सहायक कार्य मानसून के बाद पूरे किए जाएंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए और निर्माण सामग्री व तकनीकी मानकों का पूर्ण पालन हो।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, मानसून से पहले पानी के भीतर किए जाने वाले सभी जरूरी कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके बाद मौसम अनुकूल होने पर शेष सहायक कार्य आगे बढ़ाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि परियोजना के पूरा होने से गर्जिया मंदिर और आसपास का क्षेत्र लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।
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