
रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर के ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की इस भूमि पर लंबे समय से लोगों द्वारा अवैध रूप से खेती की जा रही थी। संयुक्त टीम द्वारा क्षेत्र में किए गए सर्वे के दौरान ड्रोन की मदद से कब्जाई गई भूमि को चिन्हित किया गया, जिसके बाद अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
तराई पश्चिमी वन प्रभाग की यह भूमि लंबे समय से विवादों में रही है। कई बार वन विभाग ने अवैध कब्जों को चिन्हित किया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण कई प्रशासनिक कदम अटक गए थे। इस बीच, भूमि का सरकारी उपयोग भी प्रभावित हो रहा था।
आधिकारिक जानकारी
कुछ वर्ष पहले वन विभाग ने लगभग एक हेक्टेयर भूमि नगर पालिका को ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए दी थी और इसके बदले नगर पालिका ने करीब एक करोड़ रुपये वन विभाग को प्रदान भी किए थे। इसके बावजूद उसी भूमि पर कई लोगों द्वारा अवैध खेती जारी है।
आज प्रशासनिक टीम — जिसमें अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल, वन विभाग की एसडीओ किरण शाह, राजस्व विभाग, पुलिस और नगर पालिका के अधिकारी शामिल थे — सर्वे के लिए मौके पर पहुंची। टीम ने ड्रोन कैमरे से पूरे क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया और अवैध कब्जे चिन्हित किए।
टीम के पहुंचते ही कई अतिक्रमणकारियों में बेचैनी दिखी और कुछ लोगों की अधिकारियों से हल्की नोकझोंक भी हुई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से इस भूमि पर खेती करने वाले कुछ लोगों ने इसे अपनी निजी जमीन समझ लिया है, जबकि कई ग्रामीणों का मानना है कि इस मामले में असली दोष उन लोगों का है जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन बेचकर भोले-भाले लोगों को गुमराह किया। इलाके में चर्चा है कि अब जब प्रशासन सख्त कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है, तो आगे बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
अधिकारी बयान और जांच की स्थिति
अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि वर्ष 2024 में इस मामले में कुछ लोगों के खिलाफ वन भूमि पर अवैध कब्जे का मुकदमा दर्ज किया गया था और जांच अभी जारी है। सरकार के निर्देश पर पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है।
जांच में सामने आया है कि कुछ व्यक्तियों ने कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर वन भूमि को बेहद कम दामों में कई परिवारों को बेच दिया। इससे न केवल सरकारी योजनाएँ प्रभावित हुईं, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण भी धोखाधड़ी का शिकार हुए।
आगे क्या?
प्रशासन पहले चरण में नगर पालिका को आवंटित ट्रेंचिंग ग्राउंड की भूमि से अवैध कब्जे हटाने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों की रणनीतिक बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। रामनगर क्षेत्र में लगभग एक हजार हेक्टेयर वन भूमि पर पांच सौ से अधिक परिवारों के अतिक्रमण का अनुमान है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि कब से वास्तविक हटाने की कार्रवाई शुरू होगी और किस पैमाने पर होगी।






