
रायवाला: गिद्धों के संरक्षण को लेकर राजाजी टाइगर रिजर्व ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को मोतीचूर रेंज में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) इंडिया के सहयोग से एक इजिप्शियन गिद्ध को सैटेलाइट टैग लगाकर स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ा गया। इस टैग के माध्यम से गिद्ध की गतिविधियों, भोजन स्थलों और आवास क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गिद्धों को प्रकृति का “सफाईकर्मी” कहा जाता है, लेकिन पिछले दो दशकों में इनकी संख्या में तेज गिरावट आई है। विशेषकर डाइक्लोफेनाक दवा, जहरीले चारे और बिजली के तारों की टक्कर से गिद्ध विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए हैं।
उत्तराखंड में गिद्धों की आबादी बढ़ाने और उनके संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग और WWF लंबे समय से संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।
सैटेलाइट टेलीमेट्री का उपयोग
वन्यजीव प्रतिपालक अजय सिंह लिंगवाल ने बताया कि 2023 से उत्तराखंड वन विभाग और WWF इंडिया गिद्धों पर सैटेलाइट टेलीमेट्री के तहत शोध कर रहे हैं। प्रथम चरण में छह गिद्धों को GPS टैग किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में और अधिक गिद्धों को टैग करने की प्रक्रिया चल रही है।
इस बार लगाए गए सैटेलाइट टैग का वजन मात्र 50 ग्राम है और यह गिद्ध के मूवमेंट, भोजन स्थलों और विश्राम क्षेत्रों की जानकारी लगातार भेजता रहेगा।
इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य की संरक्षण रणनीति बनाने में किया जाएगा।
विशेषज्ञों की उपस्थिति और प्रक्रिया
मोतीचूर रेंज में आयोजित इस कार्यक्रम में WWF इंडिया के कार्यक्रम निदेशक डॉ. सेजल बोरा, तकनीकी निदेशक डॉ. जी. अरिंद्रन, डॉ. आई.पी. बौपंना और संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
राजाजी के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विवेकानंद सती और वन क्षेत्राधिकारी महेश प्रसाद सेमवाल भी मौके पर मौजूद थे।
इजिप्शियन गिद्ध कौन है?
इजिप्शियन वल्चर, जिसे सफेद गिद्ध भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे पुरानी गिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह अपनी बुद्धिमानी के लिए जाना जाता है और पत्थर से अंडे तोड़ने की अद्भुत क्षमता रखता है।
यह पक्षी यूरोप और अफ्रीका से भारत तक प्रवास करता है और ऐतिहासिक रूप से कई सभ्यताओं में इसे पवित्र माना गया है।
लेकिन आज यह प्रजाति “एंडेंजर्ड” श्रेणी में है और तेजी से घटती संख्या चिंताजनक है।
राजाजी रिजर्व में गिद्धों की बढ़ती मौजूदगी
हिमालय की तलहटी में बसे राजाजी टाइगर रिजर्व में हाल के वर्षों में गिद्धों की संख्या बढ़ने लगी है। वन कर्मियों ने कई क्षेत्रों में सफेद गिद्ध और शाहीन बाज की उपस्थिति दर्ज की है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
आगे क्या?
वन विभाग आने वाले महीनों में और अधिक गिद्धों को GPS टैग करने की योजना बना रहा है।
इन डेटा के आधार पर गिद्धों के मूवमेंट कारिडोर की पहचान, ज़हरमुक्त क्षेत्रों का निर्माण और सुरक्षित आवास विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।






