
पिथौरागढ़: सीमांत जिला पिथौरागढ़ की आधी आबादी की महिला स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने वाला एकमात्र महिला चिकित्सालय इन दिनों गंभीर स्टाफ संकट से गुजर रहा है। विशेषज्ञ महिला चिकित्सकों के तीन स्वीकृत पदों में से वर्तमान में केवल एक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल संचालित हो रहा है। 10 फरवरी के बाद हालात और बिगड़ने की आशंका है, क्योंकि बांडधारी चिकित्सक का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इसका सीधा असर जिले की महिलाओं के साथ-साथ नेपाल, चंपावत और बागेश्वर से आने वाली मरीजों पर पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पिथौरागढ़ महिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ महिला चिकित्सकों के तीन पद स्वीकृत हैं। इनमें से एक स्थायी चिकित्सक इस समय मातृत्व अवकाश पर हैं। दूसरा पद बांडधारी महिला चिकित्सक के पास है, जिनका बांड कार्यकाल 10 फरवरी को समाप्त हो रहा है, जबकि तीसरा पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है। ऐसे में पूरे महिला चिकित्सालय की जिम्मेदारी एक ही विशेषज्ञ पर आ गई है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ की पीएमएस भागीरथी गर्ब्याल ने बताया कि महिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक पद पहले से रिक्त है और स्थायी महिला चिकित्सक मातृत्व अवकाश पर हैं। उन्होंने कहा कि निदेशालय को इस स्थिति से अवगत करा दिया गया है और मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम महिलाएं निजी अस्पतालों में इलाज करा लेती हैं, लेकिन मध्यम और कम आय वर्ग की महिलाओं के लिए महिला चिकित्सालय ही एकमात्र सहारा है। यहां लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई बार आपात स्थिति में मरीजों को जनपद से बाहर रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और जान दोनों का खतरा बना रहता है।
आंकड़े और तथ्य
महिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ में प्रतिदिन लगभग 300 महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। हर महीने करीब 200 प्रसव कराए जाते हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत सिजेरियन होते हैं। पिथौरागढ़ के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में महिलाएं यहां प्रसव के लिए पहुंचती हैं, जिससे अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव रहता है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी समस्याएं
महिला स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ जनपद में ट्रामा सेंटर की कमी भी लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। पिछली सरकार में बेरीनाग में ट्रामा सेंटर निर्माण की घोषणा हुई थी, लेकिन प्रस्ताव आज तक फाइलों में ही अटका है। इसके अभाव में गंभीर घायलों को 230 किलोमीटर दूर हल्द्वानी रेफर करना पड़ता है, जिससे कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
आगे क्या होगा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएस नबियाल ने कहा कि भविष्य में जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल बनने के बाद ट्रामा सेंटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि बेरीनाग ट्रामा सेंटर के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिली है। वहीं महिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को लेकर भी शासन स्तर पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
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