
देहरादून: उत्तराखंड में फार्मा विनिर्माण और वितरण उद्योगों की निगरानी अब और सख्त होगी। फार्मेसी इंस्पेक्टरों के निरीक्षण कार्य में बाधा डालने पर अब संबंधित फार्मा उद्योग या मेडिकल स्टोर संचालक पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। केंद्र सरकार के जन विश्वास बिल-2025 के तहत फार्मेसी एक्ट में किए गए संशोधन को राज्य में लागू कर दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य दवाइयों के व्यापार को सुगम बनाने के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
फार्मा सेक्टर में गुणवत्ता और नियामकीय अनुपालन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले फार्मेसी एक्ट के तहत निरीक्षण में बाधा डालने पर कारावास और नाममात्र के जुर्माने का प्रावधान था, जिसे उद्योग जगत और प्रशासन दोनों ही व्यवहारिक नहीं मानते थे। जन विश्वास बिल-2025 के माध्यम से इन्हीं प्रावधानों को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार केएस फरस्वाण ने बताया कि जन विश्वास बिल-2025 के तहत फार्मेसी एक्ट में कई संशोधन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले निरीक्षण में बाधा डालने पर छह माह का कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान था, जिसे अब समाप्त कर अधिकतम एक लाख रुपये जुर्माने में बदला गया है। यह संशोधन राज्य में लागू कर दिया गया है।
संशोधित प्रावधान क्या हैं
संशोधित नियमों के तहत फार्मेसी इंस्पेक्टरों को फार्मा उद्योगों और मेडिकल स्टोरों में निरीक्षण का स्पष्ट अधिकार दिया गया है। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित संस्थान में पंजीकृत फार्मासिस्ट की नियुक्ति है या नहीं। इसका उद्देश्य दवाइयों के निर्माण और बिक्री में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
फार्मा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कारावास की जगह जुर्माने का प्रावधान अधिक व्यवहारिक है, लेकिन निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। वहीं आम लोगों का मानना है कि सख्त निगरानी से दवाइयों की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
आंकड़े / तथ्य
नए संशोधन के तहत निरीक्षण में बाधा डालने पर अधिकतम एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। पहले यही अपराध छह माह के कारावास और मात्र एक हजार रुपये के जुर्माने से जुड़ा था।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग और फार्मेसी काउंसिल की ओर से आने वाले समय में निरीक्षण अभियान तेज किए जाने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से फार्मा सेक्टर में अनुशासन बढ़ेगा और दवाइयों की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सकेगा।







