
पौड़ी जनपद के डोभाल ढांडरी और कोटी गांव में बढ़ती गुलदार गतिविधियों के बीच वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। कोटी गांव के पास लगाए पिंजरे में एक गुलदार पकड़ा गया, जिसे रेस्क्यू कर नागदेव रेंज पौड़ी लाया गया है, जहां पशु चिकित्सक उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ महीनों में पौड़ी क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियां लगातार बढ़ रही थीं, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। हाल ही में कोटी गांव में एक महिला की मौत और डोभाल ढांडरी में एक महिला के घायल होने के बाद वन विभाग ने विशेष अभियान चलाया था। इसी अभियान के तहत ट्रैप कैमरे लगाए गए और विभिन्न स्थानों पर पिंजरे तैनात किए गए।
कैसे फंसा गुलदार
वन विभाग ने कोटी गांव के समीप दो पिंजरे लगाए थे। इन्हीं में से एक में आज गुलदार कैद हो गया। रेंजर दिनेश नौटियाल ने बताया कि गुलदार की उम्र लगभग चार वर्ष आंकी गई है। उसे रेस्क्यू कर नागदेव रेंज पौड़ी लाया गया है, जहां स्वास्थ्य परीक्षण के बाद अगले कदम उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार उठाए जाएंगे।
गुलदार के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र का माहौल
गुलदार के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से लोग जंगल और खेतों में जाने से डर रहे थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में एक से अधिक गुलदार सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
डोभाल ढांडरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि पकड़े गए गुलदार से कुछ राहत अवश्य मिली है, लेकिन अभी भी वे भय में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि— “जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक गांव वाले अकेले खेत या जंगल नहीं जा सकते।”
वन विभाग की कार्रवाई और तैयारी
वन विभाग ने पुष्टि की है कि मनुष्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है
- ट्रैप कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है
- जंगल से लगे गांवों में सुरक्षा टीमों को तैनात किया गया है
- स्कूल आने-जाने वाले बच्चों और जंगल की ओर जाने वाली महिलाओं को दल के साथ भेजा जा रहा है
गौरतलब है कि कोटी गांव में महिला की मौत के बाद गुलदार को आदमखोर घोषित कर शूट करने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
आगे क्या?
वन विभाग यह जांच कर रहा है कि पकड़ा गया गुलदार हाल की घटनाओं के लिए जिम्मेदार था या नहीं। कैमरों और गश्त के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं क्षेत्र में दूसरा गुलदार तो सक्रिय नहीं।
मामले में आगे की कार्रवाई गुलदार के स्वास्थ्य परीक्षण और उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बाद तय होगी।






