
पौड़ी: सर्दियों के मौसम में जहां भालुओं को सामान्यतः जंगलों की गहराई में शीतनिद्रा में होना चाहिए, वहीं इस बार उनकी गतिविधियां असामान्य रूप से बढ़ गई हैं। पौड़ी जिले में भालू बस्तियों तक पहुँच रहे हैं, हमले बढ़े हैं और अब तक 12 लोग घायल हो चुके हैं, जबकि 53 मवेशी उनका शिकार बने हैं। यह स्थिति ग्रामीणों में गहरी चिंता और भय का कारण बन गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में पिछले कुछ वर्षों से मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है, लेकिन पौड़ी जिले की मौजूदा स्थिति गंभीर मानी जा रही है। भालुओं की असामान्य सक्रियता ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को चुनौती दे दी है। जहां सर्दियों में उनकी गतिविधि लगभग शून्य हो जाती थी, वहीं इस वर्ष वे लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं।
अधिकारिक जानकारी
वन अधिकारियों के अनुसार पैठाणी रेंज, कल्जीखाल और थलीसैंण क्षेत्रों में भालू की गतिविधि तेजी से बढ़ी है।
- पैठाणी में भालुओं ने कई मवेशियों पर हमला किया, जिनमें कुछ की मौत भी हुई।
- गंभीरता देखते हुए वन विभाग ने विशेष टीम बनाई, जो ट्रैंकुलाइज उपकरणों के साथ लगातार गश्त कर रही है।
कुछ समय नियंत्रण के बावजूद भालू दोबारा सक्रिय हो गए, जिससे वन विभाग की चुनौतियाँ बढ़ गई हैं।
गढ़वाल वृत्त के वन संरक्षक आकाश वर्मा ने कहा: “बीते सालों में पौड़ी जिले में ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी। इस बार दो महीनों में भालू की गतिविधियां कई गुना बढ़ गई हैं।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
थलीसैंण और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि वे सुबह–शाम खेतों और रास्तों पर निकलने से डर रहे हैं। लोगों ने बताया कि घास, चारा और लकड़ी लाने जैसे दैनिक कार्य भी जोखिम भरे हो गए हैं। कुछ महिलाओं ने कहा कि जंगल में काम करना अब पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा।
जिवई गांव की घटना के बाद स्थानीयों में दहशत और बढ़ गई है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन की कमी, पर्यावरणीय बदलाव और वन क्षेत्रों में मानव गतिविधियों के बढ़ने से भालू गांवों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। वे बताते हैं कि ऐसी स्थितियों में जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया दोनों जरूरी हैं।
डेटा / आंकड़े
वन विभाग के अनुसार जनवरी 2025 — 20 नवंबर 2025 तक:
- भालू के हमले में घायल: 12 लोग
- भालू के हमलों में मौत: 1 व्यक्ति
- मवेशियों पर हमले: 53
- सक्रिय क्षेत्र: पैठाणी, कल्जीखाल, थलीसैंण
जिवई गांव की घटना
17 नवंबर को बीरोंखाल ब्लॉक के जिवई गांव में घास काटने गई लक्ष्मी देवी (40) पर झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक हमला कर दिया।
- गंभीर चोटें: दाईं आंख और सिर पर
- ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर महिला को अस्पताल पहुंचाया
- स्थिति गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया
यह घटना भालुओं की अनियमित गतिविधि और बढ़ते जोखिम का ताजा उदाहरण है।
वन विभाग का रुख और कार्रवाई
वन विभाग का कहना है कि लक्ष्य भालुओं को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव को रोकना है।
- प्रभावित क्षेत्रों में टीमें तैनात
- लगातार गश्त
- गांवों में जागरूकता अभियान
- मूवमेंट पर निगरानी
वन विभाग आशा कर रहा है कि सर्दियों के बढ़ते तापमान में भालू जंगलों में लौट जाएंगे, लेकिन तब तक लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
आगे क्या?
वन विभाग ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे समूह में जंगल जाएं, शोर करते रहें और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचना दें।
आगामी दिनों में विभाग स्थानीय समितियों और ग्राम प्रधानों के साथ समन्वय बढ़ाकर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की योजना बना रहा है।





