
पौड़ी: हिमालयी अंजीर यानी “बेडू” को अब भौगोलिक संकेतक (GI Tag) की मान्यता मिल गई है। यह उत्तराखंड के पौड़ी जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। महिला स्वयं सहायता समूहों की वर्षों की मेहनत और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से यह जीआई टैग पौड़ी की संस्कृति और जैव विविधता की पहचान बन गया है।
महिला समूहों की मेहनत से मिली बड़ी सफलता
पौड़ी ब्लॉक के महिला समूह पिछले दो वर्षों से बेडू प्रसंस्करण इकाई के माध्यम से इस पारंपरिक फल से जैम, चटनी, स्क्वैश और मिठाई जैसे उत्पाद बना रहे हैं। यह इकाई राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित “उमंग स्वायत्त सहकारिता बिचली ढांढरी” द्वारा संचालित है।
इसी संस्था ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय में जीआई टैग के लिए आवेदन किया था, जो अब स्वीकृत हो गया है।
तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग
इस परियोजना की स्थापना में रीप, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, केवीके भरसार के साथ-साथ ह्यूमन वैलफेयर एसोसिएशन वाराणसी के डॉ. रजनीकांत ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया। इसके लिए प्रशासन की ओर से ₹2.50 लाख की वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई थी।
वर्तमान में फेडरेशन के अंतर्गत 31 गांवों के 62 स्वयं सहायता समूहों की 388 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। यह महिलाएं स्थानीय किसानों से ₹60 प्रति किलो की दर से बेडू खरीदकर उत्पाद तैयार करती हैं।
हिलांस ब्रांड से देशभर में पहचान
इन उत्पादों का विपणन “हिलांस ब्रांड” के माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में भी किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने में यह फेडरेशन एक मॉडल इकाई के रूप में उभर रही है।
डीएम स्वाति भदौरिया ने दी बधाई
जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कहा —
“बेडू को जीआई टैग मिलने से पौड़ी की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। इससे स्थानीय किसानों और महिला समूहों को आर्थिक और सामाजिक दोनों रूप से लाभ मिलेगा।”
महिलाओं की आय में होगा इज़ाफा
उमंग फेडरेशन की अध्यक्ष उमा देवी ने कहा —
“यह उपलब्धि हम सभी महिला समूहों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अब बेडू उत्पादों के मूल्य में वृद्धि होगी और हमारी आय में सीधा लाभ पहुंचेगा।”







