
पछवादून: पछवादून क्षेत्र में जगह-जगह आयोजित विराट हिंदू सम्मेलनों में वक्ताओं ने समाज से जाति-पाति का भेद मिटाकर एकजुट होने का आह्वान किया। सम्मेलनों में यह बात प्रमुखता से रखी गई कि बच्चों में बचपन से ही संस्कारों का बीजारोपण जरूरी है, क्योंकि संस्कारवान पीढ़ी से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। वक्ताओं ने धर्म के प्रचार-प्रसार और सामाजिक समरसता को समय की आवश्यकता बताते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव पर जोर दिया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
विकासनगर, सहसपुर, झाझरा, हरबर्टपुर और सेलाकुई क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज में एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं के संरक्षण को लेकर विचार-विमर्श करना रहा। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता इन सम्मेलनों में शामिल हुए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
ये आयोजन सामाजिक और धार्मिक प्रकृति के रहे। प्रशासनिक स्तर पर किसी औपचारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सम्मेलन समाज को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। उनका मानना है कि जब लोग भेदभाव से ऊपर उठकर एक मंच पर आते हैं, तो सामाजिक सौहार्द मजबूत होता है और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा मिलती है।
आंकड़े और तथ्य
विकासनगर के बरोटीवाला-लक्ष्मीपुर स्थित द्रोणा पब्लिक स्कूल में आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को दो वर्ष की आयु से ही संस्कार की शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे गलत दिशा में भटकने से बचें। सहसपुर स्थित गुरु राम राय इंटर कॉलेज परिसर और झाझरा में हुए सम्मेलनों में भी सामाजिक समरसता, सनातन परंपराओं के संरक्षण और आपसी सहयोग पर जोर दिया गया।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में संवाद बना रहे और सांस्कृतिक चेतना को और मजबूत किया जा सके।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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