
देहरादून: 40वीं वाहिनी पीएसी में तैनात एक दलनायक की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का शासनादेश करीब दो माह तक पुलिस मुख्यालय नहीं पहुंच सका। इस देरी के चलते संबंधित अधिकारी दिसंबर 2025 के बाद भी सेवा में बना रहा। मामला सामने आने के बाद अब आईजी पीएसी के स्तर से दोबारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश जारी किया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासनादेश समय पर मुख्यालय तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मिली जानकारी के अनुसार 40वीं वाहिनी पीएसी में तैनात दलनायक खजांची लाल पर वर्ष 2025 में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद गृह विभाग ने भी अपने स्तर से मामले की जांच कराई। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर 16 दिसंबर 2025 को खजांची लाल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का शासनादेश जारी किया गया था।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
आमतौर पर इस तरह के शासनादेश कुछ ही दिनों में पुलिस मुख्यालय तक पहुंच जाते हैं, लेकिन इस मामले में आदेश समय पर मुख्यालय नहीं पहुंच सका। परिणामस्वरूप संबंधित अधिकारी निर्धारित तिथि के बाद भी पद पर कार्य करता रहा। मामला संज्ञान में आने पर 4 फरवरी 2026 को आईजी पीएसी द्वारा शासन की अनुमति से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दोबारा जारी किया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रशासनिक हलकों में इस देरी को गंभीर माना जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि इतनी महत्वपूर्ण फाइल समय पर संबंधित कार्यालय तक क्यों नहीं पहुंची और इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
आगे क्या होगा
इस पूरे प्रकरण की जांच डीआईजी पीएसी मुकेश कुमार को सौंपी गई है। दीपम सेठ ने बताया कि जांच अधिकारी को शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि शासनादेश पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने में देरी किन कारणों से हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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