
चौखुटिया (अल्मोड़ा): अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ ‘ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन’ अब पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बन गया है। बुधवार को चौखुटिया की सड़कों पर हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ा, जिसने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया — “अब और नहीं बर्दाश्त!”
महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और पूर्व सैनिकों ने एकजुट होकर बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। भीड़ ने नारे लगाए — “रेफर नहीं, इलाज चाहिए!” — और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन देहरादून तक पहुंच जाएगा।
जनता की आवाज: ‘रेफर-रेफर वाली व्यवस्था खत्म हो’
आंदोलन का नेतृत्व पूर्व सैनिक भुवन कठायत सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया।
कठायत ने कहा —
“हमारा स्वास्थ्य मौलिक अधिकार है। रेफर-रेफर की यह व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। सरकार सिर्फ घोषणाओं से नहीं, कार्रवाई से भरोसा दिलाए।”
जनता ने स्थानीय अस्पतालों की स्थिति पर नाराज़गी जताई और आरोप लगाया कि स्वास्थ्य केंद्रों में न डॉक्टर हैं, न दवाइयाँ। लोगों का कहना है कि मरीजों को रेफर करने की मजबूरी अब आम बात बन चुकी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आंदोलन
‘ऑपरेशन स्वास्थ्य’ को लेकर X (पूर्व ट्विटर) पर सैकड़ों पोस्ट्स और वीडियो वायरल हो रहे हैं। #OperationSwasthya और #ChaukhutiaAndolan जैसे हैशटैग प्रदेशभर में ट्रेंड कर रहे हैं।
एक यूज़र हिमांशु लटवाल ने लिखा — “जब जिम्मेदार सोए, तो जनता को जागना ही पड़ता है।”
वहीं कुमाऊं जागरण के पोस्ट में कहा गया — “यह भीड़ बसों से नहीं, दर्द से उठी है।”
लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी ने जनगीतों के ज़रिए लोगों को एकजुट किया। उनके गीतों ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
सरकार पर बढ़ता दबाव
आंदोलनकारियों ने सरकार पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने 1000 करोड़ रुपए प्रचार पर खर्च किए, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति अब भी बदतर है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत पर जनता का दबाव बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक हलकों में भी चर्चा है कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में अन्य जिलों — नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ — तक फैल सकता है।
एकजुट जनता, नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। जनता की एकजुटता ने सरकार के लिए चुनौती तो खड़ी की ही है, साथ ही यह भी साबित कर दिया है कि जब व्यवस्था चुप होती है, तब जनता आवाज़ बन जाती है।
फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।







