
नैनीताल: उत्तराखंड में सहायक अध्यापक बेसिक भर्ती की काउंसलिंग से एक अभ्यर्थी को बाहर किए जाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने अहम हस्तक्षेप किया है। हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक, उत्तरकाशी को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को कल होने वाली काउंसलिंग में शामिल किया जाए और उसके लिए एक पद रिक्त रखा जाए। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर इस मामले में अपना जवाब पेश करने को कहा है। यह आदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में सहायक अध्यापक बेसिक पदों पर भर्ती के लिए वर्तमान में विभिन्न जिलों में काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को पात्रता को लेकर बाहर किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिस पर अब न्यायालय की निगरानी बढ़ती नजर आ रही है।
मामला क्या है
टिहरी जनपद निवासी अनिल बिष्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने बताया कि उन्होंने उत्तरकाशी जनपद में सहायक अध्यापक बेसिक की काउंसलिंग के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें इस आधार पर काउंसलिंग में नहीं बुलाया गया कि उनकी बेसिक शिक्षा और डीएलएड की डिग्री उत्तराखंड के बाहर के राज्य से प्राप्त है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वे उत्तराखंड के मूल निवासी हैं, इसके बावजूद उन्हें अवसर से वंचित किया गया।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2019 की नियमावली के अनुसार सहायक अध्यापक बेसिक पद के लिए अभ्यर्थी की बेसिक शिक्षा उत्तराखंड से होना आवश्यक है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता को काउंसलिंग में शामिल नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनोद तिवारी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि भर्ती विज्ञप्ति और नियमावली में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अभ्यर्थी की बेसिक शिक्षा या डीएलएड की डिग्री अनिवार्य रूप से उत्तराखंड से ही प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने इसे नियमों की गलत व्याख्या बताते हुए राहत की मांग की।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव भ्रम की स्थिति पैदा करता है। कई अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई कि अदालत के फैसले से भविष्य में भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक, उत्तरकाशी को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को काउंसलिंग में शामिल किया जाए और एक पद रिक्त रखा जाए। साथ ही राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।







