
नैनीताल: उत्तराखंड के भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों की अनदेखी कर अवैध होटल और रिसॉर्ट बनाने की अनुमति के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट से असंतोष जताया। कोर्ट ने उत्तरकाशी डीएम समेत अन्य अधिकारियों को 3 नवंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया। साथ ही, एनजीटी के दिशा-निर्देशों के पालन पर विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पेश करने को कहा।
सुनवाई का विवरण
हिमालयन नागरिक दृष्टि मंच ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की, जिसमें गंगोत्री से उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी के किनारे अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना वैज्ञानिक सर्वे के होटल, रिसॉर्ट, और कैंप बनाने की अनुमति दी जा रही है, जो एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है। इन निर्माणों के कारण बाढ़ और आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है।
याचिकाकर्ता ने मांग की कि निर्माण से पहले क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे हो, ताकि जान-माल की हानि को रोका जा सके। 2024 की एक पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरकाशी में पिछले पांच साल में 15 बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिनमें अवैध निर्माणों की भूमिका रही।
सरकार का पक्ष
सरकार ने कोर्ट में दावा किया कि अनुमतियां सर्वे के आधार पर दी गई हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस जवाब को अपर्याप्त माना और एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पूछा कि एनजीटी के दिशा-निर्देशों का कितना पालन हुआ और अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई की गई।
एसडीओ उत्तरकाशी ने बताया, “हमने कुछ निर्माणों की जांच की है, लेकिन पूरी जानकारी के लिए और समय चाहिए।” कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को व्यक्तिगत पेशी का निर्देश दिया।
भागीरथी इको सेंसिटिव जोन का महत्व
18 दिसंबर 2012 को पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार ने उत्तरकाशी से गंगोत्री तक 100 किलोमीटर के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया था। इस क्षेत्र में भागीरथी नदी के किनारे या वनाच्छादित क्षेत्रों में किसी भी निर्माण के लिए इको सेंसिटिव जोन कमेटी की स्वीकृति अनिवार्य है। एनजीटी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त नियम बनाए हैं, जिनमें बिना अनुमति निर्माण पर रोक शामिल है।
हिमालयन नागरिक दृष्टि मंच के याचिकाकर्ता रमेश जोशी ने कहा, “नदी किनारे और ग्लेशियर के पास अवैध निर्माण पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हर साल बाढ़ आती है, फिर भी बिना सर्वे अनुमति दी जा रही है।”
पर्यावरण और आपदा का खतरा
उत्तरकाशी में भागीरथी नदी के किनारे अनियंत्रित निर्माण से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। 2023 में उत्तरकाशी में आई बाढ़ ने 50 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचाया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि हिमालय व्यू और नेचर लवर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बिना सोचे-समझे अनुमतियां दी जा रही हैं, जो दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन रही हैं।







