
मसूरी: “पहाड़ों की रानी” मसूरी शनिवार को उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के उल्लास में सराबोर नजर आई। राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में नगर पालिका परिषद मसूरी की ओर से भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसने पूरे शहर को उत्सवमय बना दिया। लोक संस्कृति, पारंपरिक परिधान और ढोल-दमाऊं की थाप पर सजे इस जश्न ने मसूरी की वादियों को गर्व और आस्था के रंगों में रंग दिया।
भव्य शोभायात्रा से गूंजा शहर
सुबह से ही माल रोड, सर्वे चौक और आस-पास के क्षेत्रों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। देश-विदेश से आए पर्यटक भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनकर झूम उठे। शोभायात्रा में उत्तराखंड की चारों सांस्कृतिक परंपराओं — गढ़वाल, कुमाऊं, जौनसार और जाजपुर की झलक देखने को मिली। हर झांकी ने अपनी वेशभूषा, नृत्य और संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की आत्मा को साकार रूप दिया।
हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
जैसे ही शोभायात्रा मसूरी शहीद स्थल के पास पहुँची, ऊपर से हेलीकॉप्टर द्वारा फूलों की बारिश की गई। श्रद्धा, उल्लास और भावनाओं के इस अनोखे संगम ने पूरे शहर को उत्सव के माहौल में डूबो दिया। लोगों ने अपने घरों और दुकानों से पुष्पवर्षा कर प्रतिभागियों का स्वागत किया।
नगर पालिका की अनूठी पहल
इस वर्ष शोभायात्रा में नगर पालिका परिषद की गोल्फ कार्ट सेवा को भी विशेष रूप से शामिल किया गया, जो आकर्षण का केंद्र बनी रही। बैंड की मधुर धुनों के बीच स्थानीय नागरिक पारंपरिक वेशभूषा में झूमते नजर आए। ढोल-दमाऊं की थाप और उत्तराखंडी लोक नृत्यों ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक भी थिरकने से खुद को रोक नहीं पाए।
शोभायात्रा का शुभारंभ और संदेश
शोभायात्रा का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने सर्वे चौक से फीता काटकर किया।
उन्होंने कहा —
“आज उत्तराखंड जवान हो चुका है। पिछले 25 वर्षों में राज्य ने विकास की नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। सड़क, रेल और चारधाम यात्रा परियोजनाओं ने प्रदेश को नई दिशा दी है।”
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि उन्हीं के प्रयासों से उत्तराखंड राज्य का सपना साकार हुआ था,
और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी राज्य को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में जुटे हैं।
भविष्य के लिए संदेश
मीरा सकलानी ने कहा कि 25 वर्ष का यह पड़ाव केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है।
उन्होंने कहा —
“अब समय आ गया है कि सभी राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन एक मंच पर आकर विचार करें कि अगले 25 वर्षों में उत्तराखंड को किस दिशा में ले जाना है।”
उनका यह संदेश शहरवासियों के लिए विकास और एकजुटता का आह्वान बन गया।
जनभागीदारी और सांस्कृतिक उत्सव
स्थानीय स्कूलों, महिला समूहों, स्वयंसेवी संस्थाओं और कलाकारों ने शोभायात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकगीतों पर प्रस्तुतियों ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। मसूरी के निवासी और पर्यटक इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए।







