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मसूरी के लंढौर बाजार में पिछले कुछ महीनों से जमीन धंसने की समस्या तेजी से बढ़ गई है, जिससे सड़क, दुकानों और मकानों में चौड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। लगभग एक फुट तक जमीन बैठ जाने से स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों दहशत में हैं। जोशीमठ के भू-धंसाव के बाद मसूरी में ऐसे ही खतरे के संकेत मिलना चिंता को और बढ़ा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
लंढौर बाजार मसूरी का लगभग 200 साल पुराना और ऐतिहासिक क्षेत्र है, जो भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञ पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि मसूरी भूकंप क्षेत्र-4 में आता है, जहां जमीन धंसाव जैसी घटनाओं का जोखिम अधिक है। हाल की अतिवृष्टि और भूस्खलन ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है।
धंसता बाजार, बढ़ता खतरा
स्थानीय दुकानदार बलबीर रावत, प्रताप सिंह रावत, संदीप अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, शैलेंद्र बिष्ट और व्यापार मंडल महामंत्री जगजीत कुकरेजा बताते हैं कि दो वर्षों से सड़क लगातार धंस रही है, लेकिन हाल के महीनों में यह गति बहुत तेज हो गई है। उनके अनुसार, सड़क कम से कम एक फुट नीचे बैठ चुकी है और कई बाइक दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। आसपास के मकानों में चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं।
अवैध खुदाई पर स्थानीयों के आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाजार के निचले हिस्से में अवैध खुदाई और अनियोजित निर्माण धंसाव की मुख्य वजह है। लोगों ने मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण और प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि शिकायतें विभागों में लंबित पड़ी हैं और अधिकारी स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहे। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो पूरा लंढौर बाजार खतरे में पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार मसूरी पहले से ही नाजुक भूगर्भीय संरचना पर बसा है। आईआईटी रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट और अन्य वैज्ञानिक एजेंसियां पिछले वर्षों में क्षेत्र का निरीक्षण कर चुकी हैं, लेकिन रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं की गईं। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं—“क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?”
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती दरारें और जमीन का धंसना जोशीमठ जैसी स्थिति की ओर संकेत कर रहा है। क्षेत्र में रहने वाले कई परिवार इस भय से रात में सो भी नहीं पा रहे। व्यापारियों का कहना है कि अगर यह समस्या बढ़ती रही तो बाजार की रोजमर्रा की गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ेगा।
मौसम और आपदा का दोहरा प्रभाव
हाल ही की भारी बारिश के दौरान झड़ीपानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूस्खलन दर्ज किया गया। कई सड़कें फट गईं और पानी वाले बैंड टूट गए। इन घटनाओं ने साफ किया कि मसूरी के कई हिस्से अस्थिर हो चुके हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मसूरी नगरपालिका परिषद अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि पालिका इस स्थिति को गंभीरता से देख रही है। उनके अनुसार, पहले भी कई एजेंसियों द्वारा निरीक्षण किया गया है और अब वे जिला मजिस्ट्रेट से व्यक्तिगत रूप से मिलकर आगे की कार्रवाई पर चर्चा करेंगी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर चुके हैं।
आगे क्या?
पालिका ने संकेत दिया है कि आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन की ओर से विस्तृत भू-गर्भीय सर्वेक्षण, अवैध निर्माणों पर रोक और धंसाव रोकने के लिए इंजीनियरिंग उपायों की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोग एक ठोस कार्ययोजना की मांग कर रहे हैं।





