
मुनि की रेती (टिहरी गढ़वाल): चौदह बीघा स्थित रामलीला मैदान में आयोजित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के दौरान निराश्रित पशुओं की समस्या प्रत्यक्ष रूप से सामने आ गई। शुक्रवार को आयोजित शिविर में जब अधिकारी और कर्मचारी जनता की शिकायतें सुन रहे थे, तभी निराश्रित गोवंश का एक समूह कार्यक्रम स्थल में घुस आया। एक सांड़ विभागीय स्टॉल में जा पहुंचा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों को भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। कार्यक्रम में आए लोगों ने इसे क्षेत्र में बढ़ती निराश्रित पशुओं की समस्या का जीवंत उदाहरण बताया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ, जिसमें लोग अपनी विभिन्न समस्याएं लेकर पहुंचे थे। अधिकांश शिकायतें निराश्रित गोवंश को शिफ्ट करने, सीवर बहने और क्षतिग्रस्त सड़कों से जुड़ी थीं।
कार्यक्रम के दौरान अचानक निराश्रित पशुओं का झुंड मैदान में प्रवेश कर गया। एक सांड़ विभागीय स्टॉल तक पहुंच गया, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों और लोगों में हड़कंप मच गया।
रामलीला मैदान से सटे पुल पर सांड़ों का जमावड़ा लगने की शिकायत पहले भी की जाती रही है। स्थानीय लोग और सभासद कई बार इन्हें शिफ्ट करने की मांग कर चुके हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
शिविर में सीडीओ वरुणा अग्रवाल, एसडीएम आशीष घिल्डियाल, नगर पालिका परिषद मुनि की रेती-ढालवाला की अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, ईओ अंकिता जोशी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
ऊर्जा निगम के स्टॉल पर एसडीओ नरेंद्र नेगी ने उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे बताए। हालांकि निराश्रित पशुओं के अचानक प्रवेश पर मौके पर तत्काल कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उत्तराखंड क्रांति दल के नेता विकास रयाल ने गंगा में गिर रहे सीवर नालों को टेप करने और निराश्रित गोवंश की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश के कारण क्षेत्र में कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यूकेडी जिलाध्यक्ष सुरेंद्र भंडारी ने चंद्रभागा नदी में खनन, नदी किनारे खाली पड़ी जमीन पर पार्किंग विकसित करने और वार्ड नंबर नौ में निर्माणाधीन पंचायत घर का कार्य शुरू कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण दोपहिया सवार रोज गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
आंकड़े और तथ्य
शिविर में केवल 21 फरियादी सीधे शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, जबकि विभिन्न स्टॉलों पर कुल 441 लोगों की ओर से प्रतिभाग किया गया। 146 लोगों ने स्वास्थ्य जांच कराई।
स्थानीय स्तर पर शिविर के प्रचार-प्रसार की कमी भी सामने आई। नगर पालिका के किसी वार्ड में मुनादी नहीं कराई गई, जिससे कई लोगों को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं मिल पाई। परिणामस्वरूप पंडाल में लगाई गई कई कुर्सियां खाली रहीं।
आगे क्या होगा
निराश्रित पशुओं, सीवर और क्षतिग्रस्त सड़कों की समस्याओं पर अधिकारियों ने शिकायतें दर्ज कीं। अब इन मुद्दों पर संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर क्षेत्रवासियों की नजर रहेगी।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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