
देहरादून: उत्तराखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (MSSY) के दूसरे चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिसमें इस बार बैटरी एनर्जी स्टोरेज को जोड़ने पर विशेष फोकस रहेगा। पहले चरण में मिले अनुभवों और लक्ष्य प्रगति के आधार पर ऊर्जा विभाग योजना को और प्रभावी बनाने की तैयारी में है, ताकि अधिक से अधिक युवा और रिवर्स पलायन कर चुके लोग सौर ऊर्जा आधारित रोजगार से जुड़ सकें।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2020 में बेरोजगार युवाओं और कोरोना काल के दौरान रिवर्स पलायन कर लौटे लोगों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना शुरू की थी। योजना के तहत 20 से 25 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाने पर वित्तीय सहायता दी गई और लाभार्थियों को 25 वर्षों तक बिजली बेचने का अवसर मिला। बाद में कम रुझान को देखते हुए 2023 में योजना में संशोधन कर क्षमता सीमा 20 से बढ़ाकर 200 किलोवाट कर दी गई और समयसीमा 31 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई।
आधिकारिक जानकारी
ऊर्जा विभाग के अनुसार, योजना के पहले चरण में कुल 250 मेगावाट सौर परियोजनाओं का आवंटन किया गया, जिसमें से अब तक 180 मेगावाट सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और 20 मेगावाट गतिशील अवस्था में हैं। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि जिन लाभार्थियों को आवंटन के बावजूद प्लांट स्थापित नहीं हुए हैं, उनके स्थान पर वेटिंग लिस्ट के आवेदकों को मौका दिया जाएगा, ताकि 31 मार्च 2026 तक 250 मेगावाट का लक्ष्य पूरा हो सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
योजना से जुड़े लाभार्थियों और स्थानीय युवाओं का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित स्वरोजगार से आय के स्थायी अवसर बने हैं। बैटरी एनर्जी स्टोरेज जुड़ने से उत्पादन की निरंतरता बढ़ेगी और ग्रिड निर्भरता कम होगी, जिससे आय में स्थिरता आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ / विभागीय वक्तव्य
प्रमुख सचिव ने बताया कि दूसरे चरण के लिए विभागीय बैठकों का दौर पूरा हो चुका है। कंसल्टेंट के रूप में Council on Energy, Environment and Water, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी सहित विद्युत नियामक आयोग के साथ चर्चा की गई है। बैठकों में यह सहमति बनी कि दूसरे चरण में बैटरी एनर्जी स्टोरेज जोड़ना उपयोगी होगा।
आंकड़े / तथ्य
अब तक 180 मेगावाट स्थापित, 20 मेगावाट गतिशील और शेष आवंटनों के पुनर्वितरण की तैयारी है। नए चरण का विभागीय प्रस्ताव दिसंबर के अंत तक अंतिम रूप लेने की संभावना है।
आगे क्या होगा
ऊर्जा विभाग दिसंबर के अंत तक दूसरे चरण का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल के समक्ष रखेगा। स्वीकृति के बाद बैटरी एनर्जी स्टोरेज सहित संशोधित प्रावधानों के साथ योजना का विस्तार किया जाएगा, जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन और स्वरोजगार दोनों को नई गति मिलेगी।






