
चमोली: त्रिदेव को भी अपने तप से बालरूप धारण करने पर विवश कर देने वाली माता अनसूया की आराधना के लिए बुधवार और गुरुवार, 3 व 4 दिसंबर को भव्य मेले का आयोजन होगा। आस्था और श्रद्धा से ओतप्रोत इस आयोजन में प्रदेशभर से श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
माता अनसूया की कथा भारतीय सनातन परंपरा की सबसे दिव्य और प्रेरणादायी कथाओं में से एक है। मान्यता है कि माता अनसूया ने अपने तप और पतिव्रता धर्म से त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — को भी शिशु रूप धारण करने के लिए बाध्य कर दिया। इसी अद्भुत शक्ति के कारण उन्हें मातृत्व और तपस्या का सर्वोच्च स्वरूप माना जाता है।
दो दिवसीय मेला और धार्मिक आयोजन
मंदिर परिसर में बुधवार और गुरुवार को बड़े पैमाने पर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भजन–कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। स्थानीय समितियाँ और भक्तजन मिलकर मेले की तैयारियों में जुटे हुए हैं। संतान की कामना लेकर आने वाले दंपतियों के लिए विशेष पूजा का आयोजन भी किया गया है।
संतान प्राप्ति की मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, निःसंतान दंपति यदि माता अनसूया की पूजा सच्चे मन से करते हैं, तो उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में दंपति इस विशेष अनुष्ठान में शामिल होते हैं और अपने मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि माता की कृपा से अनेक परिवारों में वर्षों बाद संतान का जन्म हुआ है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि माता अनसूया का मेला केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मेलजोल का भी बड़ा आयोजन है। मेले में दूर-दूर के गांवों से परिवार पहुंचते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।
आगे क्या?
दो दिनों तक चलने वाले इस मेले में प्रत्येक दिन विशेष पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन ने भी भक्तों की सुविधा के लिए सुरक्षा, पेयजल और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की है। आयोजकों का कहना है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक रहने की संभावना है।







