
रुद्रप्रयाग जिले में द्वितीय केदार मदमहेश्वर की उत्सव डोली शुक्रवार अपराह्न अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। कपाट बंद होने के बाद पारंपरिक मार्गों से होकर आई इस डोली का स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। डोली के आगमन के साथ शीतकालीन पूजाएं भी शुरू हो गईं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मदमहेश्वर की शीतकालीन डोली हर वर्ष कपाट बंद होते ही ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विराजती है। इस परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है, जिसके तहत देव डोली रांसी, गौंडार और गिरिया जैसे पारंपरिक गांवों से होते हुए ऊखीमठ पहुंचती है। डोली यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
अधिकारिक जानकारी
रावल भीमाशंकर लिंग के नेतृत्व में डोली यात्रा ने ब्राह्मणखोली और मंगलचौंरी में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ प्रवेश किया। ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचने पर डोली पर स्वर्ण छत्र चढ़ाया गया। सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मंगल धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने फूल वर्षा कर डोली का स्वागत किया।
बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण सहित पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने भी डोली की अगवानी की। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मदमहेश्वर की कृपा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि बनी रहे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने बताया कि डोली के आगमन से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह और पर्व जैसा वातावरण बन गया। ग्रामीणों ने कहा कि यह परंपरा जन-मानस को देवत्व और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का माध्यम है। तीर्थयात्रियों ने भी उत्साह के साथ डोली यात्रा में शामिल होकर दर्शन किए।
विशेष धार्मिक गतिविधियां
ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद डोली का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया गया। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था। 20 नवंबर से तीन दिवसीय मदमहेश्वर मेला शुरू हो चुका है, जिसमें भंडारे और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
अगला कदम — क्या आगे होगा
आगामी दिनों में ओंकारेश्वर मंदिर में शीतकालीन पूजाएं नियमित रूप से आयोजित होंगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। मदमहेश्वर मेला भी तीन दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा।







