
ऋषिकेश: नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के अंतर्गत लक्ष्मणझूला क्षेत्र में कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट द्वारा संचालित 14 मंजिला भवन के मुख्य गेट पर ताले लगाए जाने से नाराज व्यापारियों ने सोमवार को सांकेतिक धरना दिया। व्यापारियों का कहना है कि गेट बंद होने से उनकी दुकानें पिछले छह दिनों से बंद पड़ी हैं, जिससे उनका कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। उन्होंने ट्रस्ट प्रशासन और संबंधित संस्थाओं से मुख्य गेट का ताला तत्काल खोलने की मांग की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
लक्ष्मणझूला एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। 14 मंजिला भवन में लंबे समय से 25 से 30 व्यापारी किराये पर दुकानें संचालित कर रहे हैं। इन दुकानों से ही व्यापारियों और उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। ऐसे में मुख्य गेट बंद होने से न केवल व्यापारियों, बल्कि पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों का पक्ष
धरने पर बैठे व्यापारियों ने बताया कि 13 जनवरी की शाम बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की टीम ने भवन के प्रथम तल पर स्थित ट्रस्ट कार्यालय में ताला लगाया। इसके अगले दिन 14 जनवरी की सुबह ट्रस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भवन के मुख्य गेट पर भी ताला लगा दिया। इसके बाद से दुकानों का संचालन पूरी तरह बंद हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि छह दिन बीत जाने के बाद भी गेट नहीं खोला गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
धरना और मांग
व्यापारियों ने ट्रस्ट प्रशासन और बीकेटीसी के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि व्यापारियों के हित और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्य गेट का ताला खोला जाए। धरने में पवन वर्मा, रिंकू वर्मा, नरेंद्र अवस्थी, संजीव वर्मा, शेखर पांडे, भास्कर पाठक, रमेश अवस्थी सहित अन्य व्यापारी शामिल रहे।
बीकेटीसी का पक्ष
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट लोगों के बीच भ्रम फैला रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की कई संपत्तियों पर रिसीवर नियुक्त हैं, जबकि 14 मंजिला भवन का मामला अलग है। इस भवन की लीज समाप्त होने के बाद सरकार ने इसे अधिग्रहित कर लिया था। देवस्थानम बोर्ड के निरस्त होने के बाद इसके सभी अधिकार बीकेटीसी को प्राप्त हो गए हैं और इस संबंध में शासनादेश भी समिति के पास मौजूद है।
आधिकारिक जानकारी
हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बीकेटीसी वर्ष 1939 से धार्मिक क्षेत्र में कार्य कर रही एक संवैधानिक संस्था है, जो दो धामों सहित 47 मंदिरों का प्रबंधन करती है। समिति का उद्देश्य धार्मिक आस्था और व्यवस्थाओं को बनाए रखना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी का भी नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और मामले का समाधान नियमानुसार किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों और पर्यटकों का कहना है कि विवाद के कारण क्षेत्र की छवि प्रभावित हो रही है। उनका मानना है कि आपसी संवाद के जरिए समस्या का समाधान जल्द होना चाहिए, ताकि पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर नकारात्मक असर न पड़े।
आगे क्या होगा
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। वहीं बीकेटीसी और ट्रस्ट प्रशासन के बीच बातचीत के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।







