
देहरादून: कुमाऊं मंडल के चार प्रमुख शहरों में पेयजल आपूर्ति और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से नई पेयजल योजनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। बुधवार को यूरोपियन इनवेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) के साउथ एशिया प्रतिनिधि ने उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) के कार्यक्रम निदेशक अभिषेक रुहेला से मुलाकात कर प्रस्तावित परियोजनाओं पर चर्चा की। बैठक में नगरीय क्षेत्रों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को शीघ्र आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूयूएसडीए द्वारा नगरीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के तहत सितारगंज, पिथौरागढ़, रुद्रपुर और काशीपुर में पेयजल आपूर्ति व वितरण प्रणाली के कार्य प्रस्तावित हैं। इन शहरों में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार के कारण पेयजल ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
यूयूएसडीए के कार्यक्रम निदेशक अभिषेक रुहेला ने बताया कि सितारगंज, रुद्रपुर और काशीपुर तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक नगर हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का सुदृढ़ होना जरूरी है। वहीं पिथौरागढ़ उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण उसकी भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं।
उन्होंने ईआईबी विशेषज्ञों से आग्रह किया कि परियोजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाए, ताकि अभिलेखीय प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप दिया जा सके। रुहेला ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना की डीपीआर पहले ही ईआईबी के साथ साझा की जा चुकी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
नगरों में रहने वाले लोगों और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से पेयजल आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। प्रस्तावित योजनाओं से नियमित, सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने की उम्मीद जगी है, जिससे शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
आंकड़े और तथ्य
ईआईबी के साउथ एशिया प्रतिनिधि माइकल स्टीडल ने बताया कि ईआईबी भारत में अक्षय ऊर्जा, मेट्रो जैसी परियोजनाओं में वित्तपोषण कर रहा है, लेकिन पेयजल सेक्टर में उत्तराखंड में यह पहला निवेश होगा।
उन्होंने कहा कि सितारगंज, रुद्रपुर और काशीपुर की भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि समान होने के कारण इन नगरों से संबंधित अभिलेखों को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।
आगे क्या होगा
बैठक के बाद यूयूएसडीए और ईआईबी के बीच समन्वय तेज किया जाएगा। अभिलेखीय औपचारिकताएं पूरी होते ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इस अवसर पर उप कार्यक्रम निदेशक संजय तिवारी और परियोजना प्रबंधक गुरुप्रीत सिंह देओल भी उपस्थित रहे।
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