
पौड़ी (कोटद्वार): कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ ‘बाबा’ विवाद अब सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। 26 जनवरी से शुरू हुआ यह मामला धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि अब इसका सीधा असर आम लोगों की ज़िंदगी पर दिखने लगा है। इस विवाद के केंद्र में आए युवक दीपक की निजी ज़िंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। उनका कहना है कि विवाद के बाद उनकी बेटी ने स्कूल जाना बंद कर दिया है और पूरा परिवार लगातार डर और तनाव के माहौल में जी रहा है।
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पृष्ठभूमि और संदर्भ
दीपक उस घटनाक्रम के बाद चर्चा में आए, जब 26 जनवरी को उन्होंने एक बुजुर्ग दुकानदार के पक्ष में खड़े होकर कथित दबाव का विरोध किया। दीपक का कहना है कि उन्होंने कोई राजनीतिक या धार्मिक लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि एक सामान्य नागरिक के रूप में इंसानियत का फर्ज निभाया। हालांकि, इसके बाद मामला तूल पकड़ता चला गया और 31 जनवरी को कुछ संगठनों से जुड़े लोगों ने कोटद्वार पहुंचकर उनके खिलाफ नारेबाजी की, जिससे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
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प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मामले में प्रशासन की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
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स्थानीय प्रतिक्रिया
दीपक का कहना है कि विवाद के बाद उनके घर का माहौल पूरी तरह बदल गया है। उनकी छोटी बेटी डर के कारण स्कूल नहीं जा पा रही है, और परिवार को हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। दीपक का जिम, जो उनकी रोज़ी-रोटी का मुख्य साधन है, 26 जनवरी के बाद कई दिनों तक बंद रहा। आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव के बावजूद उन्होंने मंगलवार को साहस जुटाकर जिम दोबारा खोला।
उनका कहना है कि डर के आगे झुक जाना समाधान नहीं है, इसलिए उन्होंने सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश की है।
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पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
कोटद्वार में इससे पहले इस तरह के विवाद सामने नहीं आए थे। लेकिन हाल के दिनों में बाहरी लोगों के आने से माहौल बिगड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे शहर की शांति और सौहार्द पर असर पड़ा है।
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आगे क्या होगा
दीपक ने प्रशासन से मांग की है कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी को भी डर के साए में जीने के लिए मजबूर न किया जाए। उनका कहना है कि यह मामला अब सिर्फ एक दुकान के नाम का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आज इंसानियत के पक्ष में खड़ा होना एक आम नागरिक के लिए जोखिम भरा होता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की भूमिका और इस विवाद का समाधान यह तय करेगा कि कोटद्वार की सामाजिक शांति किस दिशा में जाती है।
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