
खटीमा: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स बुधवार को खटीमा दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने जामा मस्जिद के प्रशासक कामिल खान से मुलाकात की। जामा मस्जिद परिसर में उनका माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर शादाब शम्स ने वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और समाज के शैक्षिक व सामाजिक उत्थान को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उनके दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कई स्थानों पर अवैध कब्जे और रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं मुद्दों के बीच वक्फ बोर्ड की ओर से संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि देशभर में केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों के संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वक्फ की लूट को रोकने के लिए वक्फ अमेंडमेंट एक्ट लागू किया गया है और सभी वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जो लोग जानबूझकर वक्फ संपत्तियों के कागजात अपलोड नहीं कराएंगे, उन्हें वक्फ माफिया की श्रेणी में रखा जाएगा। इस संबंध में प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।
स्थानीय / मानवीय आवाजें
जामा मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए बेहद जरूरी है।
स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई कि पारदर्शी प्रबंधन से वक्फ से जुड़े मामलों में भरोसा बढ़ेगा।
बयान और चेतावनी
शादाब शम्स ने कहा कि वक्फ संपत्तियों में खैरात और जकात का पैसा शामिल होता है, जो यतीमों, विधवा महिलाओं और जरूरतमंदों का हक है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी लोग वक्फ की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करेंगे, अवैध कब्जा करेंगे या लूट में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह धामी सरकार है और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कदम उठाने में कोई देरी नहीं होगी।
आगे क्या होगा
वक्फ बोर्ड की ओर से सभी वक्फ संपत्तियों को रिकॉर्ड में लाने और उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि अवैध कब्जों और दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लग सके।





