
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद घाटी में यात्रा से जुड़ा व्यापार लगभग पूरी तरह थम गया है। कुछ दिनों बाद बदरीनाथ धाम के कपाट भी बंद हो जाएंगे और तीर्थयात्रियों की संख्या शून्य हो जाएगी। ऐसे में स्थानीय लोग सरकार से शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने की मांग कर रहे हैं, ताकि ऑफ-सीजन में भी व्यवसाय और रोजगार के अवसर बने रहें।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की आधे से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से केदारनाथ और बदरीनाथ यात्रा पर निर्भर है। छह माह चलने वाले यात्रा सीजन में यहां के लोगों की दुकानें, होटल, लॉज, ढाबे, घोड़ा-खच्चर सेवाएं, डंडी-कंडी और अन्य व्यवसाय चलते हैं। लेकिन यात्रा समाप्त होते ही रोजगार लगभग शून्य हो जाता है।
बीते कुछ वर्षों में यह पैटर्न स्पष्ट हुआ है कि यात्रा के शुरू होने के बाद शुरुआती एक से डेढ़ महीने में सर्वाधिक यात्री पहुंचते हैं। मानसून में संख्या अत्यंत कम हो जाती है और अंतिम चरण में यात्रियों की संख्या बेहद सीमित रह जाती है। परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों के हाथ केवल 2–3 माह का ही प्रभावी रोजगार आता है, जिससे पूरे वर्ष का खर्च निकालना कठिन हो जाता है।
स्थानीय लोगों की चिंता और मांग
स्थानीय होटल और लॉज संचालकों के साथ ही अन्य कारोबारियों ने धामी सरकार से शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना और प्रचार अभियान की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यात्रियों को शीतकालीन यात्रा के लिए प्रोत्साहित किया जाए, तो स्थानीय लोगों को पूरे साल रोजगार मिल सकेगा।
होटल व्यवसायी नितिन जमलोकी, प्रेम गोस्वामी और रामचंद्र गोस्वामी का कहना है कि रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में कई धार्मिक और पर्यटक स्थल हैं, जहाँ शीतकाल में भी यात्री आ सकते हैं। यदि इन स्थलों का व्यापक प्रचार किया जाए तो यहां का पर्यटन वर्षभर गति पकड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि शीतकाल में आय न होने के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में पहुंच जाते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा योजनाबद्ध प्रचार-प्रसार बेहद आवश्यक है।
शीतकाल में आकर्षण वाले प्रमुख स्थल
तीर्थ और पर्यटन दोनों दृष्टि से रुद्रप्रयाग-चमोली क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण स्थान हैं, जहाँ सर्दियों में भी यात्रा संभव है। इनमें शामिल हैं—
त्रियुगीनारायण, सिद्धपीठ कालीमठ, नारायणकोटी मंदिर समूह, पंचकेदारों का शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, गुप्तकाशी का विश्वनाथ मंदिर, हरियाली देवी, मठियाणा देवी, देवरियाताल, चोपता-दुगलबिट्टा, कार्तिक स्वामी और बधाणीताल जैसे स्थल।
इन क्षेत्रों में शीतकालीन यात्रा बढ़ने से होटल, टैक्सी, स्थानीय दुकानदार और पर्यटन से जुड़े सभी वर्गों को लाभ मिल सकता है।
प्रशासन का रुख
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए प्रचार-प्रसार चलाया जा रहा है। बदरी-केदार मंदिर समिति भी इस दिशा में प्रयासरत है।
आगे की दिशा
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार सर्दियों में भी यात्रियों को आकर्षित करने के लिए विशेष पैकेज, प्रचार कैंपेन और सुविधा विस्तार पर जोर दे, तो घाटी में वर्षभर पर्यटन की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। इससे रोजगार में भी स्थिरता आएगी और पलायन पर भी रोक लगेगी।







