
रुद्रप्रयाग: आगामी केदारनाथ धाम यात्रा 2026 के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियों की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। मंगलवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समन्वय एवं समीक्षा बैठक में यात्रियों की सुविधाओं, विभागीय दायित्वों और आवश्यक संसाधनों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया कि सड़क, सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी मूल व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम और सुरक्षित रह सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर वर्ष केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुद्रप्रयाग जनपद से होकर गुजरते हैं। भौगोलिक चुनौतियों, मौसम की अनिश्चितता और भारी भीड़ के कारण यात्रा की पूर्व तैयारियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर इस बार प्रशासन ने समय से पहले समन्वय और समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है।
आधिकारिक जानकारी
बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बीकेटीसी, हक-हकूदार और अन्य स्टेकहोल्डर्स मौजूद रहे। केदारनाथ धाम यात्रा से जुड़ी प्रारंभिक व्यवस्थाओं, विभागीय जिम्मेदारियों और आवश्यक संसाधनों पर सुझावों के साथ विचार-विमर्श किया गया। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सड़क और पैदल मार्गों की स्थिति, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, आवास, यातायात, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संचार व्यवस्था पर विशेष फोकस रखा गया।
सड़क, भूस्खलन और डायवर्जन पर फोकस
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित सड़कों की समीक्षा करते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में समयबद्ध ट्रीटमेंट कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा कार्य पूरे करने को कहा गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, वहीं जहां डायवर्जन आवश्यक हो वहां स्पष्ट और पर्याप्त साइन बोर्ड लगाने पर जोर दिया गया।
पार्किंग, स्नान व्यवस्था और स्थानीय सहभागिता
यात्रा के दौरान पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए। जिन स्थानों पर स्थानीय महिला समूह पार्किंग का संचालन कर रहे हैं, वहां आय के 50 प्रतिशत हिस्से को स्थानीय समूहों और 50 प्रतिशत को प्राधिकरण को दिए जाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। इसके अलावा गौरीकुंड में श्रद्धालुओं के लिए महिला और पुरुषों की अलग-अलग स्नान व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
डंडी-कंडी संचालन के लिए समिति
डंडी-कंडी संचालन से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु उपजिलाधिकारी ऊखीमठ की अध्यक्षता में समिति गठित करने के निर्देश दिए गए। समिति में संबंधित थाना प्रभारी, समाज कल्याण अधिकारी, एडीओ पंचायत और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। इस वर्ष सभी डंडी-कंडी संचालकों का पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और सत्यापन अनिवार्य किया गया है, ताकि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा बेहतर हो सके।
घोड़ा-खच्चर संचालन पर सख्त निर्देश
बैठक में स्पष्ट किया गया कि यात्रा शुरू होने से पहले बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाएगी, जिससे बिना पंजीकरण वाले घोड़ा-खच्चर मार्ग में शामिल न हो सकें। पंजीकरण में स्थानीय संचालकों को प्राथमिकता दी जाएगी और सभी घोड़ा-खच्चरों का बीमा अनिवार्य रहेगा। पशुपालन विभाग द्वारा बीमा कंपनियों के विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे।
सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन
पुलिस विभाग को यात्रा मार्ग और पड़ावों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखने, मोबाइल चोरी जैसी घटनाओं पर नियंत्रण और टेंटों में ठहरने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वच्छता व्यवस्था के तहत सुलभ शौचालयों में सफाई कर्मियों की तैनाती और महिला शौचालयों में सेनेटरी पैड डिस्पोजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। ठंड से बचाव के लिए प्रमुख स्थलों पर अलाव की व्यवस्था होगी। सोनप्रयाग से ऊपर क्षेत्र में मांस, शराब और अन्य मादक पदार्थों पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते की गई ये तैयारियां यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद करेंगी। व्यापारियों और हक-हकूदारों ने भी प्रशासन के साथ समन्वय कर कार्य करने की बात कही।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने सभी विभागों से चरणबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से तैयारियां शुरू करने का आह्वान किया है। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते एहतियाती उपाय किए जाएंगे। आगामी बैठकों में प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।







