
देहरादून — प्रदेश में अगले वर्ष शुरू होने वाली चारधाम यात्रा से पहले केदारनाथ हेली सेवा के लिए नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। वर्ष 2023 में हेली कंपनियों के साथ किया गया करार यात्रा शुरू होने से पहले ही समाप्त हो रहा है, ऐसे में यात्रा को सुचारू और सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए नई कंपनियों का चयन किया जाएगा। प्रशासन की तैयारी है कि इस बार सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया जाए, उड़ानों की संख्या व समय-सारिणी को नियंत्रित किया जाए और टिकट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। इसका असर हेली सेवा के किराये पर भी पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर वर्ष केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवाओं का संचालन किया जाता है। बीते सीजन में हेली सेवा के जरिए बड़ी संख्या में यात्रियों ने दर्शन किए, लेकिन संचालन, टिकट बुकिंग, उड़ानों की संख्या और सुरक्षा मानकों को लेकर कई शिकायतें सामने आईं। कुछ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं भी हुईं, जिसके बाद दो हेली कंपनियों को निलंबित किया गया था। इन्हीं कारणों से दूसरे चरण में हेली सेवाओं को काफी नियंत्रित रखा गया।
आधिकारिक जानकारी
यूकाडा (उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण) के अनुसार, इस वर्ष यात्रा समाप्त होने के बाद तीन वर्ष का करार पूरा हो चुका है। अब अगले वर्ष की यात्रा से पहले नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। डीजीसीए द्वारा सितंबर में जारी सख्त नियमों के अनुरूप ही हेली सेवाओं का संचालन किया जाएगा।
यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि कंपनियों से पुराने करार समाप्त हो चुके हैं, ऐसे में आगामी यात्रा के लिए नई शर्तों पर टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि हेली सेवाओं में सुरक्षा और पारदर्शिता सबसे अहम है, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
व्यापारियों का मानना है कि यदि व्यवस्था बेहतर होती है तो इससे यात्रा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा होगा।
आंकड़े / तथ्य
इस वर्ष हेली सेवा के माध्यम से 1.40 लाख से अधिक यात्रियों ने केदारनाथ धाम के दर्शन किए। हेली कंपनियों ने इस दौरान 56 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया। दूसरे चरण में हेली सेवाओं के किराये में 49 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी।
आगे क्या?
यूकाडा द्वारा टेंडर दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हेलीकॉप्टरों की तकनीकी स्थिति, पायलटों का अनुभव, आपातकालीन व्यवस्था और मौसम से निपटने की तैयारी जैसी शर्तों को प्राथमिकता दी जाएगी। उड़ानों की संख्या और समय-सारिणी को अधिक व्यवस्थित किया जाएगा और हेली सेवाओं की निगरानी के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाएगा।






