
नैनीताल: पौड़ी गढ़वाल के सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ मां भगवती ज्वाल्पा देवी मंदिर से जुड़े अतिक्रमण के मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मंदिर की भूमि और अधिकार पर दावा करने वाले सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से भी दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह जनहित याचिका पौड़ी गढ़वाल निवासी हरि किशन थपलियाल की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि मां ज्वाल्पा देवी मंदिर एक प्राचीन सिद्धपीठ है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन कथित अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आधिकारिक जानकारी
याचिका के अनुसार मंदिर की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है और मंदिर पर अधिकार जताया जा रहा है। इस वजह से श्रद्धालुओं के आवागमन और पूजा में बाधा उत्पन्न हो रही है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए हैं और राज्य सरकार को भी अपना पक्ष अदालत में रखने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मां ज्वाल्पा देवी मंदिर से उनकी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि अदालत के हस्तक्षेप से मंदिर को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, ताकि श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना कर सकें।
मां ज्वाल्पा देवी मंदिर का धार्मिक महत्व
मां ज्वाल्पा देवी मंदिर पौड़ी–कोटद्वार मार्ग पर नयार नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
स्कंदपुराण के अनुसार देवी शची ने देवराज इंद्र को पाने के लिए इसी स्थान पर मां पार्वती की आराधना की थी, जो सफल हुई। इसी कारण अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर की कामना लेकर यहां दर्शन के लिए आती हैं। ज्वाल्पा देवी को विशेष रूप से थपलियाल और बिष्ट समाज की कुलदेवी भी माना जाता है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अगली सुनवाई में अदालत तय करेगी कि मंदिर भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर क्या कार्रवाई की जाए।






