
देहरादून। न्यायाधीशों और अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जानकारी को केवल “गोपनीय” बताकर रोका नहीं जा सकता। मुख्य सूचना आयुक्त ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और यह सिद्धांत न्यायपालिका पर भी लागू होता है। आदेश के अनुसार, शिकायतों की संख्या, प्रक्रिया और निस्तारण से जुड़ी सूचनाएं सार्वजनिक हित में आती हैं, हालांकि किसी व्यक्तिगत अधिकारी या न्यायाधीश की पहचान उजागर नहीं की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
सूचना का अधिकार कानून का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। समय-समय पर यह सवाल उठता रहा है कि क्या न्यायपालिका से जुड़ी शिकायतें गोपनीयता के दायरे में आती हैं या सार्वजनिक हित में उनकी जानकारी दी जानी चाहिए। इसी संदर्भ में यह मामला सूचना आयोग के समक्ष आया।
आधिकारिक जानकारी
यह फैसला मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की द्वितीय अपील पर सुनाया। अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आयोग ने सक्षम अधिकारी से अनुमति लेकर एक माह के भीतर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश की पहचान उजागर नहीं की जाएगी।
मामले का विवरण
अपीलकर्ता ने एक जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच उत्तराखंड की अधीनस्थ न्यायालयों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इनमें न्यायिक अधिकारियों पर लागू सेवा नियम, उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों की संख्या, शिकायतों पर की गई अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई और संबंधित प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेज शामिल थे।
इस पर लोक सूचना अधिकारी ने शिकायतों को संवेदनशील और गोपनीय बताते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सूचना आयोग पहुंचा।
आयोग की टिप्पणी
आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि केवल गोपनीयता का हवाला देकर सूचना रोकी नहीं जा सकती। शिकायतों की संख्या, निस्तारण की प्रक्रिया और प्रणाली सार्वजनिक हित के दायरे में आती है। आयोग ने यह भी दोहराया कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की आधारशिला हैं और यह सिद्धांत न्यायपालिका से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी लागू होते हैं।
आगे क्या होगा
आयोग के निर्देशानुसार, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद निर्धारित समयसीमा में आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







