
चमोली जिले के जोशीमठ नगर क्षेत्र से सटे दूरस्थ थेंग गांव में भालू के हमलों ने एक बार फिर दहशत फैला दी है। रविवार रात भालू ने गांव की एक गौशाला को तोड़कर अंदर बंधी बकरियों और अन्य पशुधन को अपना शिकार बना लिया। इस हमले से न केवल एक परिवार की आजीविका को भारी नुकसान पहुंचा है, बल्कि पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से भालू आतंक जारी है, लेकिन ठोस समाधान के अभाव में हालात बदतर होते जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जोशीमठ क्षेत्र के कई गांव इन दिनों मानव-भालू संघर्ष से जूझ रहे हैं। नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) द्वारा भालू प्रबंधन के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दूरस्थ इलाकों में हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। थेंग गांव इस सीजन में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है।
क्या हुआ थेंग गांव में
क्षेत्र पंचायत सदस्य रमा देवी के अनुसार रविवार रात भालू ने थेंग गांव निवासी मोहन सिंह नेगी पुत्र माधो सिंह की गौशाला को फाड़ दिया। हमले में गौशाला में बंधी बकरियों सहित पशुधन को नुकसान पहुंचा। घटना के बाद पीड़ित परिवार सदमे और आक्रोश में है, क्योंकि पशुपालन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।
आधिकारिक व प्रशासनिक पक्ष
ग्रामीणों का कहना है कि नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में गश्त और गोष्ठियों के बावजूद आक्रामक भालुओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। अधिकारी संपर्क में नहीं आए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
थेंग गांव के जनप्रतिनिधि धन सिंह ने बताया कि बीते कई महीनों में भालुओं ने गांव में करीब 60 से अधिक पालतू मवेशियों को अपना शिकार बनाया है और दर्जनों गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। अधिकांश शिकार दुधारू गायों और बकरियों का हुआ है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एकमात्र आधार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा हालात में न तो लोग सुरक्षित हैं और न ही उनका पशुधन।
आंकड़े / तथ्य
ग्रामीणों के अनुसार अब तक 60 से अधिक पालतू मवेशी भालू के हमलों में मारे जा चुके हैं।
दर्जनों गौशालाएं क्षतिग्रस्त होने की बात कही जा रही है।
प्रभावित पशु मुख्य रूप से दुधारू गायें और बकरियां हैं।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि आक्रामक भालुओं को तत्काल पकड़कर आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाए और हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण नन्दा देवी बायोस्फियर रिजर्व मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।





