
जयहरीखाल (पौड़ी गढ़वाल) — कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे जयहरीखाल ब्लॉक के ग्राम पंचायत अमलेसा और आसपास के गांवों में बीते कई दिनों से दहशत का कारण बने बाघ को वन विभाग की टीम ने ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया है। रविवार तड़के की गई इस कार्रवाई के बाद बाघ को पिंजरे में कैद कर कॉर्बेट की ढेला रेंज ले जाया गया। बाघ की सक्रियता के चलते ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था, खासकर पांच दिसंबर को एक महिला की जान जाने की घटना के बाद। बाघ के पकड़े जाने से क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे पौड़ी जिले के सीमावर्ती गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही अक्सर बनी रहती है। बीते कुछ वर्षों में बाघ और गुलदार की सक्रियता बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। अमलेसा और सिरोबाड़ी क्षेत्र में हालिया घटना के बाद से ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल था।
आधिकारिक जानकारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत कुमार के नेतृत्व में एसओजी और रेस्क्यू टीम पिछले दो दिनों से बाघ की लगातार निगरानी कर रही थी। केटीआर की प्लेन रेंज के रेंजर अमोल इष्टवाल ने बताया कि रविवार तड़के करीब तीन बजे सिरोबाड़ी गांव में बाघ को सफलतापूर्वक ट्रैंकुलाइज किया गया। इसके बाद उसे पिंजरे में कैद कर ढेला रेंज भेज दिया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी के कारण महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे थे।
ग्राम पंचायत अमलेसा के प्रधान गजेंद्र सिंह पुंडीर, सेंधी की प्रधान निर्मला रावत और पूर्व प्रधान भगत सिंह ने बताया कि क्षेत्र में बाघ के पकड़े जाने से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन आसपास के जंगलों में अन्य वन्यजीवों की सक्रियता को देखते हुए निगरानी जरूरी है।
आंकड़े / तथ्य
पांच दिसंबर को डाल्यूंगाज गांव में 60 वर्षीय उर्मिला देवी पर बाघ ने हमला कर जान ले ली थी।
घटना के बाद से बाघ लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।
बाघ को ट्रैंकुलाइज कर ढेला रेंज भेजा गया है।
आगे क्या?
वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में निगरानी जारी रखी जाएगी, क्योंकि आसपास के जंगलों में गुलदार और अन्य वन्यजीव भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों से सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर न जाने की अपील की गई है।







