
देहरादून: प्रदेश में चल रहे जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार कार्यक्रम के तहत न्याय पंचायत स्तर पर लगाए गए बहुउद्देशीय शिविरों में 23 दिनों के भीतर 16 हजार से अधिक शिकायतों का निपटारा किया गया है। इस दौरान दो लाख से अधिक लोगों ने शिविरों में भाग लिया, जबकि 1,21,375 नागरिकों को राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिला। 17 दिसंबर से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक सभी जिलों में 300 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार कार्यक्रम का उद्देश्य शासन को सीधे जनता के बीच ले जाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। इस पहल के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सरकारी सेवाओं और योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
आधिकारिक जानकारी
कार्यक्रम के तहत अब तक उत्तराखंड के सभी जिलों में 300 से अधिक बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 1,97,522 नागरिकों ने सहभागिता कर अपनी समस्याएं, सुझाव और आवश्यकताएं संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखीं। कुल 22,645 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 16,000 से अधिक का निस्तारण कर दिया गया है। शेष शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
आंकड़े / डेटा
शिविरों के दौरान विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए 33,158 आवेदन प्राप्त हुए। वहीं, राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,21,375 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया गया। कार्यक्रम में अल्मोड़ा, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर और देहरादून समेत सभी जिलों में व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिविरों में पहुंचे लोगों का कहना है कि एक ही स्थान पर कई विभागों के अधिकारी उपलब्ध होने से समस्याओं के समाधान में आसानी हुई। ग्रामीण क्षेत्रों से आए नागरिकों ने बताया कि उन्हें प्रमाणपत्र, पेंशन, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी और लाभ एक ही दिन में मिल सका।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार कार्यक्रम केवल एक योजना नहीं, बल्कि सेवा, समाधान और संवेदनशीलता का अभियान है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों और आवेदनों का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और मजबूत हो।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ जनता के द्वार तक पहुंचने का अभियान जारी रहेगा। सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिविरों के माध्यम से शेष शिकायतों का भी जल्द समाधान किया जाएगा।





