
देहरादून: उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत लागू हर घर नल-हर घर जल योजना लंबे समय से अपने अंतिम चरण में अटकी हुई थी। केंद्र से बजट जारी न होने के कारण न केवल परियोजनाएं लक्ष्य से पीछे चल रही थीं, बल्कि योजना को धरातल पर उतारने वाले ठेकेदारों की पेमेंट भी लंबित थी। इस वजह से कई स्थानों पर कम्प्लिशन सर्टिफिकेट तक जारी नहीं हो पा रहे थे। अब केंद्रीय बजट में जल जीवन मिशन के लिए बड़े पैमाने पर राशि का प्रावधान होने के बाद राज्य सरकार को उम्मीद है कि लंबित कार्य पूरे होंगे और भुगतान संबंधी अड़चनें दूर होंगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
राज्य सरकार के अनुसार जल जीवन मिशन में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 की है। इसके बावजूद उत्तराखंड ने केंद्र से राशि मिलने की उम्मीद में अपने हिस्से से अतिरिक्त भुगतान किया, ताकि काम रुके नहीं। हालांकि केंद्र से बजट जारी न होने के कारण योजना की रफ्तार प्रभावित हुई और ठेकेदारों की देनदारी सरकार पर बनी रही। सिंचाई मंत्री द्वारा भी इस विषय को केंद्र के समक्ष उठाया गया था।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
केंद्रीय बजट में जल जीवन मिशन के लिए 67,670 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उत्तराखंड में हर घर नल-हर घर जल योजना को पूरा करने में मदद मिलेगी और लंबे समय से लंबित ठेकेदारों की पेमेंट हो पाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार अपने हिस्से से करीब 650 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर चुकी है और अब केंद्र से लंबित राशि मिलने से राज्य की वित्तीय स्थिति को भी राहत मिलेगी।
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स्थानीय प्रतिक्रिया
देवभूमि कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि सरकार के इस कदम से ठेकेदारों की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा को समझा गया है। उनका कहना है कि ठेकेदारों ने अपनी पूंजी लगाकर योजना के कार्यों को आगे बढ़ाया और अब बजट जारी होने से उन्हें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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आंकड़े और तथ्य
जल जीवन मिशन से जुड़े प्रमुख आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में इस योजना के तहत कुल 16,555 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई थी, जिनकी अनुमानित लागत 9,426.05 करोड़ रुपये है। अब तक 15,459 परियोजनाओं पर कार्य हो चुका है, जबकि 1,096 परियोजनाएं शेष हैं।
राज्य में योजना के अंतर्गत अब तक 6,634.05 करोड़ रुपये के कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसमें राज्य सरकार ने 1,260.68 करोड़ रुपये, जबकि केंद्र ने 5,193.75 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। केंद्र से अभी भी 3,289.69 करोड़ रुपये की राशि मिलनी शेष बताई जा रही है।
योजना के माध्यम से अब तक 9,507 गांव, यानी कुल लक्ष्य का 63.47 प्रतिशत, हर घर जल से जोड़े जा चुके हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार का कहना है कि केंद्रीय बजट में प्रावधान और योजना की समय-सीमा बढ़ने से शेष कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। लक्ष्य है कि जून 2026 तक जल जीवन मिशन को पूरी तरह लागू कर दिया जाए, ताकि राज्य के हर घर तक नल से जल पहुंच सके।
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