
देहरादून। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में सामने आई गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए कहा कि खामियां पाए जाने पर कई राज्यों में काम रोका गया है और 4 हजार से अधिक कर्मचारियों, अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा और सुधार होने पर ही फंड जारी किया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि हर घर नल और पानी की गुणवत्ता जांच की व्यवस्था नरेंद्र मोदी के प्रयासों से संभव हुई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक नल से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। देशभर में बड़े पैमाने पर चल रहे इस कार्यक्रम में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी
पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिशन के तहत अब तक करीब 15 करोड़ घरों तक नल पहुंचाए जा चुके हैं। अगले चरण में चार करोड़ और घरों को जोड़ने की योजना है, लेकिन कुछ स्थानों पर खामियां और शिकायतें सामने आईं। इन मामलों में 4 हजार से अधिक जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई है और जहां अनियमितताएं मिलीं, वहां फंड का भुगतान रोका गया है।
स्थानीय / मानवीय पहलू
मंत्री ने जोर देकर कहा कि पानी की गुणवत्ता की जांच और इससे जुड़ी ट्रेनिंग को मजबूत किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित जल मिले। उन्होंने संकेत दिया कि यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।
आंकड़े / तथ्य
मिशन के तहत 15 करोड़ घरों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अगले चरण में चार करोड़ घरों को जोड़ने का लक्ष्य है। गड़बड़ियों के मामलों में 4 हजार से अधिक कर्मचारियों, अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि गड़बड़ियों को ठीक कराना अनिवार्य है, चाहे वह किसी भी राज्य या ठेकेदार से जुड़ी हों। जो काम मानकों के अनुरूप नहीं होगा, उसे फंड नहीं मिलेगा। आने वाले दिनों में राज्य सरकारें यदि आवश्यक कार्रवाई करती हैं और सुधार दिखता है, तो फंड जारी किया जाएगा।







