
नैनीताल में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जागेश्वर मंदिर के रखरखाव और प्रबंधन के लिए मंदिर समिति गठित करने संबंधी अपने पुराने आदेश के अनुपालन न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि वर्ष 2013 में दिए गए निर्देशों का अब तक पालन क्यों नहीं किया गया। खंडपीठ ने 30 दिसंबर तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है और इसी दिन अगली सुनवाई तय की है। यह मामला श्रद्धालुओं की आस्था, मंदिर प्रबंधन और पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण खास महत्व रखता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
याचिकाकर्ता रमेश चंद्र जोशी, निवासी जागेश्वर, ने जनहित याचिका दायर कर बताया कि वर्ष 2013 में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जागेश्वर मंदिर की देखरेख के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। आदेश के अनुसार समिति में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का एक सदस्य, दस स्थानीय सदस्य और राज्यपाल द्वारा नियुक्त एक प्रबंधक शामिल होना था। उद्देश्य मंदिर प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना और रखरखाव सुनिश्चित करना था।
आधिकारिक जानकारी
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में हुई। अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा कि इतने वर्षों बाद भी समिति का गठन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि 30 दिसंबर तक अनुपालन की स्थिति से अवगत कराया जाए। अधिकारी संपर्क में नहीं आए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि समिति न होने के कारण मंदिर की नियमित देखरेख प्रभावित हो रही है। श्रद्धालुओं ने बताया कि चढ़ावे और दान की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है, जिससे विश्वास पर असर पड़ता है। उनका मानना है कि अदालत के आदेशों का पालन होने से व्यवस्था सुधर सकती है।
आंकड़े / तथ्य
जागेश्वर धाम में 124 छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है, जो अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 12 साल बीत जाने के बाद भी न तो समिति बनी और न ही चढ़ावे व दान का कोई ऑडिट कराया गया। आरटीआई मांगने पर पुजारियों द्वारा निजी संस्था होने का हवाला देने की बात भी याचिका में कही गई है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 30 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि पूर्व आदेशों के अनुपालन के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे और क्या मंदिर समिति के गठन तथा वित्तीय ऑडिट की प्रक्रिया शुरू होगी।






