
मसूरी: जंगल क्षेत्रों में निर्माणाधीन भवनों का मलबा डालकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ वन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों के बाद गठित संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर दबिश दी और मौके पर मलबा फेंकते हुए चार पिकअप वाहनों को सीज कर दिया। वन विभाग का कहना है कि इस तरह की अवैध डंपिंग से मसूरी की हरियाली और जैव विविधता को गंभीर क्षति पहुंच रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मसूरी और आसपास के वन क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध मलबा डंपिंग की शिकायतें सामने आ रही थीं। निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा जंगलों में फेंककर प्राकृतिक ढलानों और हरित आवरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। पर्यावरणविदों ने भी कई बार इस पर चिंता जताई थी।
कैसे हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों की शिकायतों के आधार पर वन विभाग ने संयुक्त टीम का गठन किया और विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान जंगल में मलबा फेंकते हुए चार पिकअप वाहन पकड़े गए, जिन्हें मौके पर ही सीज कर दिया गया।
प्रशासन का रुख
पिछले दिनों कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की समीक्षा बैठक में भी अवैध डंपिंग का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद डीएफओ अमित कंवर ने संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
वन विभाग का बयान
वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जंगल में मलबा फेंकने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चार पिकअप वाहनों को सीज किया गया है और आगे भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से अवैध डंपिंग से जंगलों को नुकसान हो रहा था। लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए अभियान को निरंतर जारी रखने की मांग की है।
आगे क्या होगा
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा। जंगलों में अवैध मलबा फेंकने की घटनाओं पर नजर रखी जाएगी और दोषी पाए जाने पर वाहन सीज करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




