
हरिद्वार। आबादी वाले इलाकों में जंगली हाथियों के घुसने का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार सुबह दो जंगली हाथी मिस्सरपुर क्षेत्र में प्रवेश कर गलियों में काफी देर तक घूमते रहे। हाथियों को देखकर लोग दहशत में घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद करने लगे और तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई। वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा, लेकिन लगातार बढ़ती इस मूवमेंट ने स्थानीय लोगों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरिद्वार जिले में हाल के महीनों में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। विशेषकर जगजीतपुर, मिस्सरपुर, पथरी और कनखल इलाकों में जंगली हाथियों की आवाजाही लगभग रोज़ की बात बन गई है। फसलों का नुकसान, वाहनों की तोड़फोड़ और रात के समय हाथियों के झुंड की मौजूदगी ने ग्रामीणों और शहरवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
आधिकारिक जानकारी
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व और हरिद्वार वन प्रभाग के अधिकारी लगातार गश्ती दल तैनात कर रहे हैं, लेकिन हाथियों की बढ़ती गतिविधि को रोकना चुनौती बना हुआ है। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि अर्धकुंभ 2027 से पहले प्रभावित क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए एलीफेंट प्रूफ ट्रेंच (हाथियों को रोकने के लिए खाई) बनाने की योजना प्रस्तावित की गई है। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और योजना के तहत लगभग 8 किलोमीटर लंबी खाई बनाई जाएगी। इसके साथ सोलर फेंसिंग भी लगाने की तैयारी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी अक्सर रात के समय खेतों में घुसकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। कई किसान बताते हैं कि वन विभाग को सूचना देने के बाद भी समय पर मदद नहीं मिल पाती। लोग इस बात से भी नाराज हैं कि हाथियों की लगातार बढ़ती मूवमेंट के बावजूद सुरक्षा उपाय अपर्याप्त हैं। शहरी इलाकों में रहने वाले लोग सुबह-शाम टहलने से कतराने लगे हैं, क्योंकि हाथियों के वीडियो रोज़ाना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
मानव–वन्यजीव खतरा और पूर्व घटनाएँ
बीते सप्ताह ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बिजलीघर में एक जंगली हाथी घुस गया था। वन विभाग की टीम ने बड़ी मुश्किल से उसे सुरक्षित बाहर निकाला। लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि हाथियों के लिए भी आबादी वाले इलाके खतरनाक हो सकते हैं। इससे पहले बहादराबाद क्षेत्र में हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हो गई थी। पिछले वर्षों में भी कई हाथियों की जान ट्रांसफार्मर, बिजली तार और नहर किनारों पर फिसलने जैसी घटनाओं में जा चुकी है।
दहशत और जनजीवन में बदलाव
लोगों का भय अब इतना बढ़ चुका है कि कई क्षेत्रों में निवासियों ने सुबह–शाम की सैर बंद कर दी है। मिस्सरपुर, जगजीतपुर, पथरी और कनखल जैसे इलाकों में हाथियों की नियमित उपस्थिति ने जनजीवन को प्रभावित किया है। वायरल हो रहे वीडियो में हाथियों के झुंड को गलियों में घूमते, खेतों में फसलें रौंदते और वाहनों को नुकसान पहुंचाते साफ देखा जा सकता है।
आगे क्या
वन विभाग द्वारा प्रस्तावित एलीफेंट प्रूफ ट्रेंच और सोलर फेंसिंग को मंजूरी मिलने के बाद बेहतर सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा सकेगी। अर्धकुंभ 2027 से पहले सरकार इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दे सकती है, क्योंकि बड़ी धार्मिक भीड़ के बीच हाथियों की उपस्थिति गंभीर खतरा बन सकती है।





