
हरिद्वार के घने जंगलों में उस समय हड़कंप मच गया, जब गश्त पर निकले वन कर्मियों को जंगल में एक नवजात हाथी शिशु पड़ा मिला। पहली नजर में शिशु मृत प्रतीत हुआ, लेकिन पास जाकर देखने पर उसके जीवित होने के संकेत मिले। नाजुक हालत को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। दिनभर मां की तलाश के बाद भी जब हथिनी वापस नहीं लौटी, तो शिशु को चिकित्सकीय निगरानी में राजाजी टाइगर रिजर्व के चीला स्थित एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर में सुरक्षित भेज दिया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह घटना रविवार को श्यामपुर रेंज के खारा क्षेत्र के जंगलों में सामने आई। वन कर्मी नियमित गश्त पर थे, तभी उन्हें कीचड़ में सना एक नवजात हाथी शिशु दिखाई दिया। पास में जेर पड़ी होने से यह स्पष्ट हुआ कि शिशु का जन्म कुछ ही घंटे पहले हुआ था। ठंड और कीचड़ के कारण उसकी हालत बेहद गंभीर थी।
आधिकारिक जानकारी
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे। चिकित्सकों ने शिशु की आंखों से कीचड़ साफ किया और उसे ठंड से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए। दिनभर आसपास के जंगलों में हथिनियों के झुंड की तलाश की गई, ताकि शिशु को उसकी मां से मिलाया जा सके। हालांकि एक हथिनी झुंड के साथ आगे बढ़ गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह शिशु की मां नहीं थी।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि पीसीसीएफ की अनुमति के बाद शिशु को सुरक्षित रूप से राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज स्थित एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर में भेजा गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वन कर्मियों का कहना है कि इतनी कम उम्र के हाथी शिशु का जीवित मिलना दुर्लभ होता है। सभी कर्मचारियों ने दिनभर उसकी जान बचाने के लिए प्रयास किए और मां के लौटने की उम्मीद में जंगल में डेरा डाले रखा।
आगे क्या होगा
वन विभाग के अनुसार हाथी शिशु की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि भविष्य में मां की पहचान संभव हुई तो पुनर्मिलन के प्रयास किए जाएंगे। फिलहाल चिकित्सकों की टीम शिशु को स्वस्थ करने में जुटी है।





