
हरिद्वार: जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखे एक शव को चूहों द्वारा कुतरने की घटना की जांच रिपोर्ट डीएम मयूर दीक्षित को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही की पुष्टि हुई है, जिसके बाद डीएम ने जिला अस्पताल के सीएमएस, पोस्टमार्टम इंचार्ज और मोर्चरी रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली ठेकेदार एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक न होने पर कठोर कार्रवाई की तैयारी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह मामला पंजाबी धर्मशाला के मैनेजर लक्की शर्मा की मौत से जुड़ा है। पांच दिसंबर की रात तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखा गया था।
अगले दिन परिवार ने देखा कि शव के कई हिस्से चूहों द्वारा कुतरे गए हैं और एक आंख को गंभीर क्षति पहुंची है। यह दृश्य देखकर परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जांच में क्या पाया गया
डीएम ने इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए एडीएम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई थी। कमेटी ने पाया कि मोर्चरी के डीप फ्रीजर सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे। जिस फ्रीजर में शव रखा गया था, उसका ढक्कन भी क्षतिग्रस्त था। रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही ठेकेदार एजेंसी की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई है।
जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मोर्चरी प्रबंधन में निगरानी और रखरखाव के मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह हृदयविदारक घटना हुई।
डीएम की कार्रवाई
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम मयूर दीक्षित ने जिला अस्पताल के सीएमएस, पोस्टमार्टम इंचार्ज और मोर्चरी संभालने वाली एजेंसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मुकदमा दर्ज करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
घटना सामने आने के बाद पंजाबी समाज, स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों में गहरा रोष है। परिजन इस मामले को अस्पताल की गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के कारण इस तरह की अमानवीय घटनाएं घट रही हैं, जिन्हें रोका जाना आवश्यक है।
आगे क्या?
अब मामला नोटिसों के जवाब पर निर्भर करेगा। डीएम ने संकेत दिए हैं कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो अस्पताल प्रशासन, पोस्टमार्टम इंचार्ज और एजेंसी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मोर्चरी प्रबंधन की संपूर्ण व्यवस्था की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।






