
देहरादून/हरिद्वार: उत्तराखंड सरकार हरिद्वार को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले से पहले हरिद्वार की गंगा सभा और कुछ साधु-संत संगठनों ने एक विशेष क्षेत्र, खासकर गंगा घाटों के आसपास, प्रवेश व्यवस्था को लेकर मांग रखी है। इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संकेत दिए हैं कि सरकार सभी हितधारकों की बातों को ध्यान में रखते हुए, प्रचलित कानूनों के दायरे में, आगे निर्णय ले सकती है। हालिया घटनाओं के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरिद्वार धार्मिक आस्था और परंपराओं का प्रमुख केंद्र है, जहां वर्ष भर देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। कुंभ मेले के आयोजन से पहले व्यवस्थाओं, सुरक्षा और परंपराओं के पालन को लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से सुझाव और मांगें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में गंगा सभा और कुछ संत संगठनों ने गंगा घाटों के आसपास की व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है।
आधिकारिक जानकारी
गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि हरिद्वार के 100 से अधिक गंगा घाटों के आसपास की व्यवस्था को स्पष्ट और सख्त किया जाए। उनका कहना है कि यह मांग धार्मिक परंपराओं और आस्था की रक्षा के उद्देश्य से रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हरिद्वार, चारधाम और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए पहले से अधिनियम और नियम मौजूद हैं, और सरकार उन्हीं के अंतर्गत जो भी उचित होगा, उस पर निर्णय लेगी।
हालिया घटना से बढ़ी चर्चा
मंगलवार को हर की पौड़ी क्षेत्र में दो युवकों के वेशभूषा बदलकर वीडियो बनाने की घटना सामने आई, जिसके बाद प्रशासन और गंगा सभा की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों युवकों को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों युवक सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने पहुंचे थे और वे हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र के निवासी हैं। इस घटना के बाद प्रवेश व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि हरिद्वार की धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम और उनका सख्ती से पालन जरूरी है।
वहीं कुछ लोगों का मत है कि किसी भी निर्णय में कानून, सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक व्यवहारिकता का संतुलन होना चाहिए।
1916 बायोलॉज का संदर्भ
हरिद्वार नगर निगम की बायोलॉज वर्ष 1916 में ब्रिटिश शासन के दौरान लागू की गई थीं। इन नियमों का उद्देश्य हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना बताया जाता है। बायोलॉज के तहत हर की पौड़ी और आसपास के कुछ क्षेत्रों में संपत्ति खरीद, व्यापार और सूर्यास्त के बाद ठहराव से जुड़े विशेष प्रावधान किए गए हैं। समय-समय पर इन नियमों के अनुपालन और व्याख्या को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि गंगा सभा, साधु-संत और अन्य संगठन हरिद्वार के प्रमुख हितधारक हैं। उनकी मांगों पर कानून और मौजूदा अधिनियमों के तहत विचार किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार की ओर से औपचारिक निर्णय या दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना है।







