
हरिद्वार: वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी, उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का आज हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन के बाद शहर में शोक की लहर है और बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। हरिद्वार के सभी सरकारी कार्यालय आज बंद रखे गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दिवाकर भट्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। राज्य के निर्माण और जनआंदोलन में उनकी भूमिका को आज भी विशेष सम्मान के साथ याद किया जाता है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे भट्ट ने मंगलवार शाम हरिद्वार स्थित शिवालोक कॉलोनी में अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
उनकी उम्र 79 वर्ष थी और पिछले कुछ वर्षों में उन्हें लगातार पांच बार ब्रेन स्ट्रोक आया था। निधन से कुछ घंटे पहले उन्हें देहरादून के एक निजी अस्पताल से घर लाया गया था। शाम करीब चार बजे उनके निधन की सूचना आई। उनके निधन से राजनीतिक दलों, आंदोलनकारियों और सामाजिक संगठनों में गहरा शोक है।
आधिकारिक जानकारी
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार दिवाकर भट्ट का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ खड़खड़ी श्मशान घाट पर किया जाएगा। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने इससे संबंधित तैयारी पूरी कर ली है।
राज्य सरकार ने उनके योगदान को नमन करते हुए आज हरिद्वार के सभी सरकारी कार्यालय बंद रखने का निर्णय लिया है। राजनीतिक दलों ने दिवाकर भट्ट के निधन को उत्तराखंड के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंच रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि दिवाकर भट्ट न केवल आंदोलनकारी बल्कि सामाजिक मुद्दों पर हमेशा सक्रिय रहने वाले नेता थे। व्यापारियों ने भी कहा कि राज्य निर्माण के संघर्ष में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
यूकेडी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके निधन से पार्टी ने एक स्पष्ट और दृढ़ नेतृत्व खो दिया है। शहर में कई स्थानों पर लोगों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
दिवाकर भट्ट का जीवन परिचय
दिवाकर भट्ट का जन्म 1 अगस्त 1946 को टिहरी जनपद के सुपार गांव पट्टी बडियारगढ़ में हुआ था। वे लंबे समय से हरिद्वार में निवास कर रहे थे। उत्तराखंड आंदोलन की विभिन्न चरणों में वह सबसे आगे रहे और बाद में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने।
उनके परिवार में पुत्र ललित भट्ट, बहू और दो नाती–नातिन हैं।
अगला कदम / आगे क्या
दिवाकर भट्ट का पार्थिव शरीर यात्रा के रूप में खड़खड़ी श्मशान घाट ले जाया जाएगा, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। कई वरिष्ठ नेता, सामाजिक संगठन और आम नागरिक अंतिम संस्कार में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।







