
हरिद्वार में डीपीएस सहित कई प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ने वाले किशोरों की भाषा और व्यवहार में तेजी से हो रहे बदलाव को लेकर सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों ने गंभीर चिंता जताई है। बोर्ड के क्षेत्रीय समन्वयक और डीपीएस हरिद्वार के प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने अभिभावकों को पत्र भेजकर बच्चों की बोलचाल, ऑनलाइन आदतों और संवाद शैली पर विशेष निगरानी रखने की अपील की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बीते कुछ वर्षों में स्कूलों में किशोरों के बीच संवाद का तरीका तेज़ी से बदला है। मोबाइल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल कंटेंट के बढ़ते उपयोग के चलते भाषा में अनौपचारिकता और असंवेदनशीलता बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हरिद्वार के स्कूलों में भी ऐसी घटनाओं के बढ़ने पर शिक्षा विशेषज्ञ चिंतित हैं।
अधिकारी/संस्थान की जानकारी
डीपीएस हरिद्वार के प्रधानाचार्य व सीबीएसई के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. अनुपम जग्गा ने अभिभावकों को भेजे पत्र में बताया कि छात्रों में गाली-गलौज के साथ बातचीत करने की प्रवृत्ति पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि ओटीटी प्लेटफार्म पर उपलब्ध वेब सीरीज भी इस शैली को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
डॉ. जग्गा ने हाल ही में हुए आईआईटी छात्रों के परामर्श सत्र का हवाला देते हुए कहा कि सफल छात्र अपनी दिनचर्या में अनुशासन, 6–8 घंटे का स्वाध्याय और किताबों-पत्रिकाओं के नियमित अध्ययन को महत्व देते हैं—वही समय आज बच्चों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में जा रहा है।
उनका कहना है कि ऑन-कैमरा विश्लेषण में कई दिनों तक छात्रों के व्यवहार को देखने पर सामने आया कि कई बच्चे बातचीत में गाली का प्रयोग, साथियों को परेशान करना और अनुचित सामग्री साझा करना जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए।
अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
पत्र में दिए गए मुख्य सुझावों में शामिल हैं—
- बच्चों से नियमित बातचीत कर जानें कि वे ऑनलाइन क्या देखते या साझा करते हैं।
- घर और डिजिटल दोनों जगह विनम्र भाषा के प्रयोग पर जोर दें।
- बच्चों को समझाएं कि ऑनलाइन किया गया हर पोस्ट स्थायी डिजिटल फुटप्रिंट छोड़ता है।
- भोजन और सोने से पहले घर में डिवाइस-फ्री ज़ोन बनाएँ।
- सोशल मीडिया उपयोग की निगरानी करें, लेकिन भरोसे और मार्गदर्शन का संतुलन बनाए रखें।
- अत्यधिक स्क्रीन टाइम की जगह पढ़ने, खेलने और वास्तविक सामाजिक संपर्क को बढ़ावा दें।
- बच्चों को सभी के प्रति संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार के लिए प्रेरित करें।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हरिद्वार के कई अभिभावकों ने स्कूल की इस पहल को सराहा और कहा कि ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण अब आवश्यक हो गया है।
स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि बच्चों में भाषा का स्तर सुधारने के लिए घर और स्कूल दोनों जगह संयुक्त प्रयास जरूरी हैं।
विशेषज्ञ राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा और व्यवहार में आया बदलाव केवल तकनीक का असर नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश का परिणाम भी है। उचित मार्गदर्शन से बच्चों की आदतें बेहतर दिशा में लाई जा सकती हैं।
संख्या / डेटा
- डीपीएस हरिद्वार में 7,000+ से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं।
- ऑन-कैमरा विश्लेषण कई दिनों तक चलाया गया।
- आईआईटी छात्र प्रतिदिन 6–8 घंटे स्वाध्याय को सफलता का प्रमुख कारण मानते हैं।
आगे क्या होगा
स्कूल प्रशासन अभिभावकों के सहयोग से बच्चों के स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन गतिविधियों और भाषा के प्रयोग पर निगरानी बढ़ाने की योजना बना रहा है। आने वाले दिनों में विद्यार्थियों के लिए परामर्श सत्र भी आयोजित किए जा सकते हैं।







