
हरिद्वार: धार्मिक नगरी हरिद्वार में अब पर्यटन के नए आयाम जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। गंगा स्नान और मंदिरों के अलावा यहां एडवेंचर और हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में पर्यटन विभाग श्यामपुर स्थित अंग्रेजों के जमाने की जेल को विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। करीब सवा सौ साल पुरानी यह जेल ऐतिहासिक रूप से कुख्यात सुल्ताना डाकू से जुड़ी हुई मानी जाती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि इस स्थल को पर्यटन से जोड़ा जाए, जिससे न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर को पहचान मिले, बल्कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरिद्वार को आमतौर पर धार्मिक पर्यटन के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां जंगल सफारी और एडवेंचर टूरिज्म की भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। श्यामपुर क्षेत्र में स्थित ब्रिटिशकालीन जेल और थाना लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे हैं। समय के साथ यह इमारत जर्जर जरूर हो गई है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व आज भी कायम है, खासकर इसलिए क्योंकि इसका संबंध 20वीं सदी की शुरुआत में चर्चित सुल्ताना डाकू से बताया जाता है।
आधिकारिक जानकारी
जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल के अनुसार, पर्यटन विभाग श्यामपुर की इस पुरानी जेल को संरक्षित कर झिलमिल झील सफारी से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। उनका कहना है कि सुल्ताना डाकू की गतिविधियां गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में रही हैं, इसलिए उनसे जुड़ा यह स्थल एडवेंचर टूरिज्म के लिहाज से खास बन सकता है। योजना के तहत जेल परिसर और आसपास के क्षेत्र को एक्सप्लोर कर पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस जेल को सुल्ताना डाकू की जेल के रूप में प्रचारित किया जाता है, तो यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच सकते हैं।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि टूरिज्म से जुड़ने के बाद इलाके में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और श्यामपुर को नई पहचान मिलेगी।
सुल्ताना डाकू से जुड़ा इतिहास
कहा जाता है कि जब अंग्रेजों ने सुल्ताना डाकू को गिरफ्तार किया था, तब उसे करीब 20 दिनों तक श्यामपुर स्थित इसी जेल में रखा गया था। सुल्ताना डाकू को लोककथाओं में एक तरह के रॉबिन हुड के रूप में देखा जाता है, जो अमीर साहूकारों से लूट कर गरीबों की मदद करता था। हरिद्वार, बिजनौर, कोटद्वार और मुरादाबाद क्षेत्र में उसकी सक्रियता के किस्से आज भी प्रचलित हैं। नजीबाबाद स्थित उसके किले पर आज भी पर्यटकों की भीड़ रहती है।
पर्यटन की संभावनाएं
पर्यटन विभाग का मानना है कि जेल को जंगल सफारी और एडवेंचर गतिविधियों से जोड़ने पर देसी-विदेशी सैलानी यहां आकर्षित होंगे। वन्यजीवों के दीदार के साथ-साथ पर्यटकों को एक ऐतिहासिक स्थल देखने और उससे जुड़ी कहानियां जानने का अवसर मिलेगा। खासकर युवा पीढ़ी ऐसे रोचक और इतिहास से जुड़े स्थलों में विशेष रुचि दिखाती है।
आगे क्या?
फिलहाल पर्यटन विभाग इस स्थल के संरक्षण और विकास की संभावनाओं पर अध्ययन कर रहा है। यदि योजना को अंतिम रूप मिलता है, तो आने वाले समय में श्यामपुर की यह ब्रिटिशकालीन जेल हरिद्वार के एडवेंचर और हेरिटेज टूरिज्म का नया केंद्र बन सकती है।







