
नैनीताल: उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में गंगा नदी की धारा परिवर्तित होने से उत्पन्न सीमा विवाद को लेकर दायर याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद अवकाश कालीन न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की पीठ ने जिला अधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए कि ग्रामीणों द्वारा कृषि कार्य को लेकर दिए गए प्रत्यावेदनों पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समयबद्ध निर्णय से प्रभावित ग्रामीण अपने कृषि कार्य कर सकेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मामले के अनुसार उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हरिद्वार जिले के रायपुर, रायघाटी, काबुलपुरी, भिक्कमपुर, जीतपुर सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले उनके गांवों से होकर गंगा नदी बहती थी, लेकिन धारा बदलने के कारण उनकी कृषि योग्य भूमि की सीमा में परिवर्तन हो गया। इससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सीमा विवाद खड़ा हो गया है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए छह सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है। अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि ग्रामीणों के लंबित प्रत्यावेदनों पर तय समयसीमा में निर्णय लिया जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि सीमा विवाद के चलते उत्तर प्रदेश वन प्रभाग उन्हें कृषि कार्य करने से रोक रहा है। इससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है और आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि उन्होंने कई बार राजस्व विभाग को प्रत्यावेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों ने मांग की है कि सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों राज्यों के राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की जाए और स्पष्ट सीमा निर्धारण के लिए पिलर लगाए जाएं। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि सीमा तय होने तक उन्हें कृषि कार्य की अनुमति दी जाए और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। अब राज्य सरकार के जवाब और जिला प्रशासन के निर्णय के बाद मामले की अगली दिशा तय होगी।
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