
देहरादून: गंगा और उसकी सहायक नदियों में अब सीवर का पानी सीधे नहीं जाएगा। राज्यभर में स्थापित 70 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) की अब सघन निगरानी की जाएगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि हर एसटीपी को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत ही चलाया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नमामि गंगे मिशन की सख्ती शुरू
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (Namami Gange) के अंतर्गत उत्तराखंड में न केवल गंगा नदी, बल्कि उसकी सहायक नदियों और अन्य जलधाराओं में भी सीवेज रोकने के लिए दर्जनों एसटीपी (STP) स्थापित किए गए हैं। अब इनकी कार्यप्रणाली की रियल टाइम निगरानी की जाएगी ताकि सीवेज का पानी सीधे नदी में न गिरे।
शिकायतों के बाद बढ़ाई निगरानी
अक्सर कई क्षेत्रों से शिकायतें आती रही हैं कि कुछ एसटीपी तकनीकी खराबी या लापरवाही के कारण सीवेज को सही ढंग से शुद्ध नहीं कर पा रहे। हाल ही में हरिद्वार की एक सहायक नदी में नाले का पानी सीधे गिरने की शिकायत सामने आई थी। नाला टैप न होने पर विभाग को नोटिस भी जारी किया गया था। इसी के बाद गंगा मिशन ने निगरानी को और सख्त करने का निर्णय लिया है।
अब होगी निरंतर मॉनिटरिंग
नमामि गंगे कार्यक्रम निदेशक विशाल मिश्रा ने बताया कि अब सभी 70 एसटीपी की 24×7 मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि —
“हर ट्रीटमेंट प्लांट को उसी एसओपी (Standard Operating Procedure) के अनुसार चलाया जाए, जो गंगा मिशन द्वारा निर्धारित की गई है। किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर तत्काल जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”
एसटीपी की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी
प्रदेश में संचालित 70 एसटीपी गंगा की प्रमुख और सहायक नदियों जैसे अस्सी गंगा, सुसवा, सोंग, कोसी, डोईवाला, नाला, नयार और भगीरथी क्षेत्रों में फैले हैं। इनका उद्देश्य शहरी और औद्योगिक इलाकों से निकलने वाले सीवेज और नाले के पानी को नदी में गिरने से पहले शुद्ध करना है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर एसटीपी में ट्रीटमेंट प्रक्रिया, पानी की गुणवत्ता और डिस्चार्ज बिंदुओं की दैनिक जांच रिपोर्ट तैयार की जाए। हर सप्ताह की रिपोर्ट अब गंगा मिशन मुख्यालय को भेजी जाएगी।
स्थानीय दृष्टिकोण और प्रतिक्रिया
ऋषिकेश निवासी गंगा प्रहरी नरेंद्र बहुगुणा ने कहा — “यह कदम स्वागतयोग्य है। कई बार सीवेज सीधे गंगा में जाने से श्रद्धालु परेशान रहते हैं। अगर निगरानी ईमानदारी से की जाए, तो गंगा स्वच्छता अभियान को असली सफलता मिलेगी।”
आगे की योजना
गंगा मिशन की योजना है कि भविष्य में सभी एसटीपी को ऑनलाइन रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (RTMS) से जोड़ा जाए। इससे हर प्लांट के आउटपुट जल की गुणवत्ता का डेटा सीधे मुख्यालय तक पहुंच सकेगा। साथ ही, स्थानीय निकायों को चेतावनी जारी की गई है कि किसी भी अनधिकृत नाले को नदी में नहीं गिरने दिया जाएगा।





