
पिथौरागढ़: सीमांत जिला पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा की सीमा से लगे गणाई गंगोली क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों के ग्रामीण बदहाल संचार व्यवस्था से परेशान हैं। पूरे क्षेत्र में मोबाइल संचार सुविधा मुख्य रूप से बीएसएनएल के भरोसे है, लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित होते ही नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाता है। गणाई गंगोली कस्बे में लगा बीएसएनएल टावर बिजली कटते ही निष्क्रिय हो जाता है, जिससे मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवा दोनों ही बेकार साबित हो रहे हैं। इससे क्षेत्र की करीब 15 हजार आबादी रोजमर्रा की संचार जरूरतों के लिए जूझ रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गणाई, कूना, चौकी, सिमली, गुनाकीटान, सिमलता, भिनगड़ी, पोखरी सहित आसपास के करीब 30 गांवों को जोड़ने के लिए गणाई गंगोली में बीएसएनएल का मोबाइल टावर लगाया गया है। बिजली गुल होने की स्थिति में टावर संचालन के लिए जनरेटर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन डीजल की कमी के चलते यह जनरेटर लंबे समय से काम नहीं कर रहा है। परिणामस्वरूप, बिजली जाते ही टावर बंद हो जाता है और सिग्नल पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
बीएसएनएल गणाई गंगोली एक्सचेंज के प्रभारी प्रकाश सिंह ने बताया कि एक्सचेंज में जनरेटर तो उपलब्ध है, लेकिन इसे चलाने के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से उच्च अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। फिलहाल बिजली आपूर्ति के सहारे ही टावर का संचालन किया जा रहा है, जिससे बार-बार सेवा बाधित हो रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इंटरनेट सेवा के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्शन भी ले रखा है, लेकिन बिजली जाते ही न मोबाइल में सिग्नल आते हैं और न ही इंटरनेट चलता है। पोखरी निवासी सुंदर सिंह और कूना निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली कटते ही मोबाइल पूरी तरह शोपीस बन जाते हैं। लोगों का कहना है कि जहां शहरों में 5G सेवाएं उपलब्ध हैं, वहीं गणाई गंगोली जैसे क्षेत्रों में बुनियादी नेटवर्क भी भरोसेमंद नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
आंकड़े और तथ्य
क्षेत्र के लगभग 30 गांव और करीब 15 हजार की आबादी इस संचार संकट से प्रभावित है। बार-बार नेटवर्क ठप होने से न केवल निजी कामकाज, बल्कि विभिन्न विभागों से जुड़े सरकारी कार्य भी बाधित हो रहे हैं।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों की मांग है कि टावर संचालन के लिए वैकल्पिक और स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि बिजली कटौती के दौरान भी संचार सेवा जारी रह सके। बीएसएनएल अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही डीजल आपूर्ति की समस्या का समाधान होगा, सेवा में सुधार लाया जाएगा।
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