
देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर रोक के तमाम दावों की एक बार फिर पोल खुल गई है। कड़े कदम, निष्कासन और जुर्माने के बावजूद रैगिंग का नया मामला सामने आया है। इस बार 2025 बैच के छात्रों ने 2023 बैच के एक छात्र पर धमकाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सीधे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएमसी ने कॉलेज प्रशासन से तत्काल जांच कर रिपोर्ट तलब की है, जिससे संस्थान की आंतरिक व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए सख्त कानून और दिशानिर्देश लागू हैं। इसके बावजूद दून मेडिकल कॉलेज में पिछले कुछ समय से रैगिंग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में सीनियर छात्रों पर सख्त कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि स्थिति सुधरेगी, लेकिन ताजा शिकायत ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।
आधिकारिक जानकारी
एनएमसी के निर्देश मिलते ही कॉलेज प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने एंटी रैगिंग कमेटी को मामले की जांच कर शीघ्र रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट एनएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच और आरोपों का स्वरूप
2025 बैच के छात्रों की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्हें सीनियर छात्र द्वारा धमकाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हैरानी की बात यह है कि यह शिकायत ऐसे समय सामने आई है, जब एक दिन पहले ही कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग के एक अन्य मामले में सीनियर छात्रों को निष्कासित किया था। इसके बावजूद नए बैच के छात्रों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
सुरक्षा और निगरानी के निर्देश
लगातार शिकायतों के बाद कॉलेज प्रशासन ने जूनियर छात्रों के हॉस्टल में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है। वार्डन, चीफ वार्डन और एंटी रैगिंग स्क्वॉड को प्रतिदिन दो बार हॉस्टल निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई के आदेश भी जारी किए गए हैं।
इसके साथ ही सीनियर और जूनियर छात्रों की संयुक्त बैठक कर रैगिंग के कानूनी प्रावधानों और गंभीर परिणामों की जानकारी दी गई और उत्पीड़न की सूचना तुरंत देने की अपील की गई।
पिछले मामलों की पृष्ठभूमि
पिछले सप्ताह ही दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया था, जिसमें 2023 और 2024 बैच के नौ छात्रों को दोषी पाए जाने पर हॉस्टल और अकादमिक निष्कासन किया गया था। दो छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने रैगिंग पर पूरी तरह लगाम लगाने का दावा किया था।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कॉलेज परिसर में छात्रों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे मामलों से जूनियर छात्रों में भय बना हुआ है। छात्रों ने मांग की है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि स्थायी और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि रैगिंग की समस्या जड़ से खत्म हो सके।
आगे क्या होगा
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट और एनएमसी के निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।






