
देहरादून: राजधानी देहरादून के दून अस्पताल में सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक लंबी कतारें लगी रहीं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सोमवार को 1776 ओपीडी कार्ड बने, जो सामान्य संख्या के अनुरूप है, लेकिन बिलिंग और पंजीकरण की धीमी प्रक्रिया तथा उपनल कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्थिति और बिगड़ गई।
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पृष्ठभूमि / संदर्भ
दून अस्पताल उत्तराखंड का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। आमतौर पर छुट्टी के बाद के पहले कार्यदिवस पर मरीजों की संख्या अधिक होती है। इस बार स्थिति इसलिए और बिगड़ी क्योंकि अस्पताल के सैकड़ों उपनल कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
मरीजों की भीड़ और अव्यवस्था
सोमवार सुबह से ही अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। बिलिंग काउंटर का चार्ज संभाल रहीं रचना भंडारी ने बताया कि “सोमवार को 1776 मरीजों के ओपीडी कार्ड बने। संख्या सामान्य थी, लेकिन धीमी बिलिंग प्रक्रिया के कारण भीड़ ज्यादा दिखी।”
ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी वार्ड में भी मरीजों की लाइनें लगी रहीं।
मौसम और बीमारियों में वृद्धि
अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. आर.एस. बिष्ट ने बताया कि “मौसम में अचानक हुए बदलाव के कारण जुखाम, बुखार और संक्रमण जैसे लक्षण तेजी से बढ़े हैं। यही वजह है कि मरीजों की संख्या सामान्य से अधिक हुई।”
उन्होंने कहा कि छुट्टी के बाद ऐसे हालात सामान्य होते हैं, लेकिन इस बार स्टाफ की कमी ने मुश्किलें बढ़ाई हैं।
उपनल कर्मचारियों की हड़ताल का असर
अस्पताल की व्यवस्थाओं के चरमराने की सबसे बड़ी वजह उपनल कर्मचारियों की हड़ताल बताई जा रही है। पिछले 15 वर्षों से उपनल सेवा में कार्यरत मीना रौंतेला ने बताया कि “दून अस्पताल में 300 से 400 उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें सफाईकर्मी, लैब स्टाफ और तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं। सभी हड़ताल पर हैं, जिससे अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।”
गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. सरस्वती कांडपाल ने कहा कि “दून अस्पताल की अधिकांश व्यवस्थाएं ऑप्शनल (उपनल) कर्मचारियों के कंधे पर टिकी हैं। आज जब ये कर्मचारी हड़ताल पर हैं, तो मरीजों को सीधा असर झेलना पड़ रहा है।”
सफाई कर्मचारी हरिओम ने बताया कि “अस्पताल में लगभग 110 सफाईकर्मी उपनल व्यवस्था से जुड़े हैं, जो हड़ताल पर हैं, जिससे साफ-सफाई की स्थिति भी बिगड़ गई है।”
उपनल महासंघ का बयान
उत्तराखंड उपनल महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप चौहान ने कहा कि “यह राज्य की विडंबना है कि जहां सरकार राज्य गठन की रजत जयंती मना रही है, वहीं हजारों उपनल कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं।”
उन्होंने कहा कि “राज्य के अधिकांश विभाग उपनल कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं। कई जगहों पर सरकारी कर्मचारी कम और उपनल कर्मचारी ज्यादा हैं।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
एक मरीज के परिजन ने कहा, “सुबह से लाइन में खड़े हैं लेकिन डॉक्टर तक पहुंचने में घंटों लग रहे हैं। स्टाफ की कमी से मरीज परेशान हैं।”
दूसरी ओर, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को उपनल कर्मचारियों की मांगों पर जल्द फैसला लेना चाहिए ताकि मरीजों की परेशानियां कम हों।
आगे क्या
अस्पताल प्रशासन ने हड़ताल खत्म कराने के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारियों के बीच वार्ता से स्थिति सामान्य हो सकेगी।







