
देहरादून: डॉल्फिन समेत अन्य जलीय जीवों के संरक्षण और रेस्क्यू को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। डॉल्फिन के स्वास्थ्य परीक्षण और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष रूप से तैयार की गई अत्याधुनिक रेस्क्यू एंबुलेंस को मंगलवार को भारतीय वन्यजीव संस्थान से रवाना किया गया। इस एंबुलेंस में एक्स-रे, ईसीजी और ब्लड एनालिसिस जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे नदियों और नहरों में फंसी डॉल्फिन को समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू और इलाज मिल सकेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देश के कई हिस्सों में डॉल्फिन नदियों से भटककर नहरों या कम पानी वाले इलाकों में फंस जाती हैं। ऐसे मामलों में समय पर रेस्क्यू नहीं होने से उनकी जान को खतरा पैदा हो जाता है। अब तक रेस्क्यू कार्य सामान्य ट्रक या अस्थायी संसाधनों के जरिए किया जाता रहा है, जिससे डॉल्फिन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी रहती थी।
आधिकारिक जानकारी
डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस को जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने रवाना किया। एंबुलेंस में स्ट्रेचर, 500 लीटर पानी की टंकी और शॉवर की व्यवस्था की गई है, ताकि रेस्क्यू के दौरान डॉल्फिन के शरीर को लगातार नम रखा जा सके। इसके साथ ही ईसीजी, एक्स-रे और ब्लड जांच की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर ही इलाज कर सकेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यह एंबुलेंस डॉल्फिन रेस्क्यू के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। स्थानीय स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि इससे जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
विशेषज्ञ की राय
टीएस फाउंडेशन इंडिया की बायोलॉजिस्ट सुप्रिया दत्ता ने बताया कि उनकी संस्था डॉल्फिन, घड़ियाल समेत अन्य जलीय जीवों के संरक्षण और अध्ययन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2013 से अब तक 41 डॉल्फिन का रेस्क्यू किया जा चुका है। वहीं भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विपल मौर्य ने बताया कि यूपी में कई बार डॉल्फिन नदियों से नहरों में पहुंच जाती हैं, जहां पानी कम होने पर उन्हें तत्काल रेस्क्यू की जरूरत पड़ती है।
आंकड़े / तथ्य
वर्ष 2013 से अब तक उत्तर प्रदेश में 41 डॉल्फिन का रेस्क्यू किया गया है। एंबुलेंस में 500 लीटर पानी की टंकी की व्यवस्था की गई है। इसमें ईसीजी, एक्स-रे और ब्लड एनालिसिस की सुविधा मौजूद है।
आगे क्या होगा
इस विशेष एंबुलेंस के माध्यम से अब डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों का रेस्क्यू अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। आने वाले समय में इसे अन्य राज्यों में भी उपयोग में लाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।







